असम में सियासी बयानबाजी तेज, गोगोई ने सीएम सरमा पर साधा निशाना
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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने बिहार में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कड़ा रुख अपनाया। अदालत ने चुनाव आयोग से पूछा कि अगर 65 लाख लोगों के नाम हटाए गए हैं और उनमें से 22 लाख की मृत्यु हो चुकी है, तो इसका बूथ स्तर पर खुलासा क्यों नहीं किया जा रहा है।
जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, “हम नहीं चाहते कि नागरिकों के अधिकार राजनीतिक दलों पर निर्भर हों।” अदालत ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया है कि हटाए गए नामों की पूरी सूची, नाम हटाने के कारण सहित, जिला निर्वाचन अधिकारी की वेबसाइट पर अपलोड की जाए।
सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि सभी पंचायत भवनों, प्रखंड विकास और पंचायत कार्यालयों में भी बूथवार यह सूची प्रदर्शित की जाए, ताकि लोगों को पारदर्शिता मिल सके। साथ ही, इस सूचना का व्यापक प्रचार स्थानीय समाचार पत्रों, दूरदर्शन, रेडियो और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर करने के निर्देश दिए गए।
अदालत ने चुनाव आयोग से अनुपालन रिपोर्ट भी मांगी है। मामले की अगली सुनवाई 22 अगस्त को होगी।
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