तेलंगाना ने SC आरक्षण में किया बड़ा बदलाव- नया वर्गीकरण लागू

  • तेलंगाना ने SC आरक्षण में किया ऐतिहासिक बदलाव, तीन हिस्सों में बांटा समुदाय

  • सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी के बाद तेलंगाना ने SC आरक्षण को वर्गीकरण में बांटा

  • आर्थिक, शैक्षणिक स्थिति के आधार पर SC आरक्षण में बंटवारा, तेलंगाना बना पहला राज्य

हैदराबाद।  तेलंगाना सरकार ने सोमवार को एक ऐतिहासिक फैसला लेते हुए अनुसूचित जाति (SC) के आरक्षण में बड़ा बदलाव किया है। अब SC समुदाय को तीन भागों में बांटा जाएगा, जिससे तेलंगाना देश का पहला राज्य बन गया है जहां इस तरह का आरक्षण लागू किया गया है।

आदेश की जानकारी देते हुए मंत्री ने कहा-

जल संसाधन मंत्री एन. उत्तम कुमार रेड्डी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि तेलंगाना सरकार ने अक्टूबर 2024 में उच्च न्यायालय के रिटायर्ड जज शमीम अख्तर की अध्यक्षता में एक कमीशन का गठन किया था। इस कमीशन ने SC समुदाय की 59 जातियों को तीन वर्गों (वर्ग I, वर्ग II और वर्ग III) में बांटने की सिफारिश की थी, ताकि सरकारी नौकरियों और शिक्षा में 15 प्रतिशत आरक्षण का लाभ सही ढंग से वितरित किया जा सके।

आरक्षण में यह बंटवारा क्यों किया गया?

जस्टिस शमीम अख्तर की अध्यक्षता वाले आयोग ने SC उप-जातियों की सामाजिक, शैक्षिक और आर्थिक स्थिति का विश्लेषण किया। इस दौरान, 8600 से अधिक लोगों से सुझाव लिए गए, जिसमें जनसंख्या वितरण, साक्षरता दर, रोजगार की स्थिति, सरकारी योजनाओं से लाभ और राजनीतिक भागीदारी जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर अध्ययन किया गया। आयोग ने इन आंकड़ों के आधार पर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसे राज्य सरकार ने स्वीकार किया।

सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी से बंटवारा हुआ संभव

सुप्रीम कोर्ट ने 1 अगस्त 2024 को SC-ST के उप-वर्गीकरण को मंजूरी दी थी। सात जजों की बैंच ने 6:1 के बहुमत से यह फैसला सुनाया था। इसके तहत, राज्यों को डेटा के आधार पर SC-ST समुदायों के भीतर आरक्षण में वर्गीकरण करने का अधिकार दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट किया था कि विभिन्न SC समुदायों के बीच पिछड़ेपन के आधार पर आरक्षण को विभाजित किया जा सकता है।

तेलंगाना में OBC आरक्षण में भी बड़ा बदलाव

इससे पहले, तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव ने 17 मार्च को घोषणा की थी कि OBC (अन्य पिछड़ा वर्ग) आरक्षण को 23% से बढ़ाकर 42% किया जाएगा। यदि यह प्रस्ताव लागू होता है, तो राज्य में आरक्षण की सीमा 62% तक पहुंच जाएगी, जो सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित 50% आरक्षण सीमा से अधिक होगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कदम कांग्रेस के चुनावी वादे को पूरा करने के लिए उठाया गया है। राज्य सरकार इस प्रस्ताव को कानूनी रूप से लागू करने के लिए हर संभव प्रयास करेगी।

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