ससुराल पक्ष ने खाना तक देना किया बंद- पीड़िता की आपबीती आई सामने

  • बेटियों के जन्म के बाद ससुराल वालों का बदला व्यवहार, पांच लाख की दहेज मांग को लेकर बढ़ा उत्पीड़न

  • खाना तक बंद कर दिया गया, स्कूल में दाखिले की बात पर बच्ची को मारने की कोशिश

  • जेवरात और कपड़े तक नहीं लौटाए, पीड़िता मायके में रहकर न्याय की कर रही मांग

जलालपुर-अम्बेडकरनगर।  थाना क्षेत्र से एक महिला ने दहेज उत्पीड़न का गंभीर मामला दर्ज कराया है। पीड़िता अनीता ने अपने ससुराल पक्ष पर मानसिक, शारीरिक और आर्थिक शोषण का आरोप लगाते हुए न्याय की गुहार लगाई है।

अनीता का विवाह 31 नवंबर 2016 को आजमगढ़ जनपद के ग्राम पचरी डिहवा निवासी शैलेश मौर्य से हुआ था। उसने बताया कि शादी के समय उसके माता-पिता ने अपनी हैसियत से बढ़कर दहेज दिया था। कुछ समय तक सबकुछ सामान्य रहा, लेकिन पहली पुत्री अनामिका के जन्म (11 सितंबर 2018) के बाद से ही रिश्तों में खटास आनी शुरू हो गई।

स्थिति तब और बिगड़ गई जब 10 जुलाई 2023 को दूसरी बेटी सौम्या का जन्म हुआ। अनीता का आरोप है कि उसके पति शैलेश मौर्य, ससुर ओम प्रकाश, सास चिन्ता देवी और ननद खुशबू ने उस पर पाँच लाख रुपये मायके से लाने का दबाव डालना शुरू कर दिया। विरोध करने पर न सिर्फ उसे, बल्कि उसकी बेटियों को भी भोजन तक से वंचित रखा गया।

अनीता ने बताया कि जब उसने बड़ी बेटी को स्कूल में दाखिला दिलवाने की बात कही, तो पति ने बच्ची का गला दबाकर जान से मारने की कोशिश की। किसी तरह उसने बेटी को बचाया, लेकिन दाखिला नहीं हो सका।

सबसे भयावह हमला 24 मार्च 2025 की रात हुआ, जब ससुराल के चारों सदस्यों ने मिलकर अनीता की बेरहमी से पिटाई की और दहेज की मांग पूरी न होने पर जान से मारने की धमकी दी।

25 मार्च को अनीता ने अपने भाई को फोन कर घटना की जानकारी दी। भाई अन्य लोगों के साथ वहां पहुंचा और अनीता को दोनों बेटियों समेत मायके ले आया। लेकिन ससुराल पक्ष ने उसके गहने, कपड़े और ज़रूरी सामान भी वापस नहीं किया।

पीड़िता ने थाना में लिखित शिकायत देकर न्याय की मांग की है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

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