
- बाबा डम्मर दास कुटी में विकास की नई आस्था का संचार
- आस्था और अधोसंरचना का अनूठा संगम बनेगा यह धार्मिक स्थल
- मंशापुर की तपोभूमि को मिलेगा आधुनिक धार्मिक पहचान
अम्बेडकरनगर। धार्मिक आस्था, आध्यात्मिक चेतना और सांस्कृतिक मूल्यों की त्रिवेणी से सिंचित मंशापुर गांव स्थित बाबा डम्मर दास कुटी धाम अब जल्द ही प्रदेश के पर्यटन मानचित्र पर एक भव्य और सुव्यवस्थित धार्मिक स्थल के रूप में उभरेगा। यह वही तपोभूमि है, जहां संत डम्मर दास जी ने वर्षों तक साधना कर लोककल्याण का संदेश दिया था।
जिलाधिकारी अविनाश सिंह के नेतृत्व, दूरदृष्टि और शासन की सकारात्मक पहल से उत्तर प्रदेश पर्यटन विकास बोर्ड ने इस धाम के समग्र विकास हेतु 56.17 लाख रुपये की विशेष वित्तीय स्वीकृति प्रदान की है। यह योजना न सिर्फ धाम के सौंदर्यीकरण की दिशा में एक ठोस कदम है, बल्कि जनपद की धार्मिक-सांस्कृतिक विरासत को भी नया आयाम देगी।
श्रद्धा का केंद्र, सुविधाओं से होगा सुसज्जित
मंशापुर ग्राम पंचायत में स्थित यह पवित्र कुटी आज भी हजारों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है, लेकिन मूलभूत सुविधाओं की कमी के कारण तीर्थयात्रियों को अब तक कई समस्याओं का सामना करना पड़ता था। हर वर्ष रामनवमी, देवोत्थान एकादशी और पूर्णिमा के अवसर पर आयोजित होने वाले तीन से पाँच दिवसीय धार्मिक मेले में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है, लेकिन व्यवस्थाओं के अभाव में आयोजन की गरिमा प्रभावित होती थी।
अब इस ऐतिहासिक स्थल को पूर्णत: विकसित करने हेतु कई निर्माण कार्य प्रस्तावित हैं, जिनमें शामिल हैं:
रानी दुर्गावती सरोवर का सौंदर्यीकरण – पवित्र स्नान के लिए आकर्षक घाटों और स्वच्छ जल की व्यवस्था।
बाबा डम्मर दास और सात शिष्यों की समाधियों का जीर्णोद्धार – इतिहास और श्रद्धा को मिलेगा नया स्वरूप।
राम-जानकी मंदिर का पुनर्निर्माण और सौंदर्यीकरण – धार्मिक स्थलों को मिलेगा दिव्य आभा।
प्रवेश द्वार एवं परिक्रमा पथ का निर्माण – श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा के लिए।
विद्युतीकरण, सजावटी लाइटिंग और पथ प्रकाश व्यवस्था – रात में भी दमकेगा धाम।
धर्मशाला, विश्राम स्थल, वस्त्र परिवर्तन कक्ष और बैठने की सुविधा – श्रद्धालुओं के लिए आरामदायक ठहराव।
संत समागम हॉल का निर्माण – संतवाणी के प्रसार का मंच।
समावेशी ढांचा – महिलाओं, बुजुर्गों और दिव्यांगजनों के लिए विशेष सुविधाएं।
विकास के साथ आएगा रोजगार और सांस्कृतिक पुनरुत्थान
इस परियोजना के माध्यम से क्षेत्रीय युवाओं, दुकानदारों, पुजारियों, कलाकारों और हस्तशिल्पियों को प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर मिलेंगे। साथ ही, यह स्थल धार्मिक आयोजनों, आध्यात्मिक शिविरों और लोकसंस्कृति के कार्यक्रमों का स्थायी मंच बन सकेगा। जिलाधिकारी अविनाश सिंह ने कहा, “हमारी कोशिश है कि अम्बेडकरनगर की धार्मिक-सांस्कृतिक पहचान को पूरे प्रदेश में गौरव के साथ प्रस्तुत किया जाए। डम्मरदास कुटी एक तपस्थली ही नहीं, श्रद्धा और चेतना का केंद्र है। इसके विकास से आस्था को बल मिलेगा और स्थानीय नागरिकों के जीवन में भी गुणात्मक सुधार आएगा।” जहां कभी साधना की गूंज थी, वहां अब विकास की घंटाध्वनि सुनाई देगी। बाबा डम्मर दास कुटी धाम अब आस्था और विकास के संगम का प्रतीक बनकर अम्बेडकरनगर को एक नई पहचान देगा।








