कागजों पर हरियाली, धरती पर बंजर- वन विभाग की हकीकत उजागर

  • वन विभाग ने लगाए 25 लाख पौधे, धरातल पर अधिकांश गायब
  • पौधारोपण के बाद देखरेख की कोई ठोस व्यवस्था नहीं
  • स्कूलों, सड़कों और पार्कों में सूखी जमीन और टूटे ट्री गार्ड

अंबेडकरनगर। हरियाली के नाम पर सरकारी दावों की हकीकत अब जनपद में सवालों के घेरे में है। वन विभाग द्वारा लगाए गए 25 लाख पौधों में से अधिकांश आज धरातल पर नहीं दिखते, जबकि वर्ष 2025 में 34 लाख पौधे लगाने का नया लक्ष्य घोषित कर दिया गया है। हालात यह हैं कि जिन जगहों पर हरियाली दिखनी चाहिए, वहां सूखी मिट्टी और टूटे ट्री गार्ड ही शेष हैं।

पौधारोपण के बाद देखरेख नहीं
विभागीय आँकड़े हर साल लाखों पौधों के रोपण की बात करते हैं, लेकिन पौधों की देखरेख, पानी, सुरक्षा और संरक्षण की जिम्मेदारी कहीं तय नहीं होती। अधिकांश पौधे पानी की कमी, मवेशियों की चपेट और मानवीय उपेक्षा के चलते कुछ ही दिनों में सूख जाते हैं। कई जगह तो ट्री गार्ड चोरी हो जाते हैं, तो कहीं ग्रामीण उन्हें जानवर बांधने के लिए इस्तेमाल करते हैं।

कागजों में हरियाली, जमीन पर हकीकत अलग
शहर के पार्कों, विद्यालय परिसरों और सड़क किनारों पर जहां पहले पौधारोपण के संकेत थे, वहां अब मिट्टी के सूखे गड्ढे या उखड़े पौधे ही बाकी हैं। जिले की अधिकांश ग्राम पंचायतों और शहरी वार्डों में पौधारोपण तो दिखाया गया, लेकिन कोई स्थाई देखरेख व्यवस्था नहीं बनाई गई। सरकारी दावों के विपरीत स्थानीय लोग अब खुद पूछने लगे हैं कि आखिर इतने पौधे कहां गए?

अवैध कटान पर भी नहीं लग रही लगाम
एक तरफ सरकारी प्रयासों से हरियाली लाने की बात हो रही है, तो दूसरी ओर अवैध कटान का कारोबार भी जोर पकड़ चुका है। वन कर्मियों की मिलीभगत और स्थानीय संरक्षण के चलते कीमती वृक्षों की कटाई और अवैध बिक्री जारी है।

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