
- गोविंद बल्लभ पंत की 138वीं जयंती पर कलेक्ट्रेट सभागार में श्रद्धांजलि कार्यक्रम
- अधिकारियों और कर्मचारियों ने माल्यार्पण कर नमन किया
- स्वतंत्रता सेनानी और उत्तर प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री पंत की उपलब्धियों पर चर्चा
अम्बेडकरनगर, संवाददाता। भारत रत्न पंडित गोविंद बल्लभ पंत की 138वीं जयंती के पावन अवसर पर बुधवार को कलेक्ट्रेट सभागार में एक श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर जिला प्रशासन के अधिकारियों व कर्मचारियों ने पंत जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उनके राष्ट्रनिर्माण में दिए गए योगदान को नमन किया। अपर जिलाधिकारी (न्यायिक) रंजीत सिंह, अपर उपजिलाधिकारी, सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी डॉ. महेश चंद द्विवेदी सहित कलेक्ट्रेट के अन्य अधिकारियों व कर्मचारियों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
स्वतंत्रता आंदोलन के अग्रणी सेनानी रहे पंत
इस अवसर पर अपर जिलाधिकारी (न्यायिक) रंजीत सिंह ने कहा कि पं. गोविंद बल्लभ पंत न केवल एक स्वतंत्रता सेनानी थे, बल्कि एक विचारशील नेता, कुशल प्रशासक और दूरदर्शी राजनेता भी थे। उन्होंने कहा कि देश को आजादी दिलाने में पंत जी की भूमिका महत्वपूर्ण रही और स्वतंत्र भारत के निर्माण में भी उनका योगदान अविस्मरणीय है।
उत्तर प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री के रूप में किए ऐतिहासिक निर्णय
अधिकारियों ने पंत जी के प्रशासनिक कार्यों की चर्चा करते हुए बताया कि वे उत्तर प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री रहे। उनके कार्यकाल में कुली बेगार प्रथा की समाप्ति, कृषि सुधार, और जमींदारी उन्मूलन जैसे कई ऐतिहासिक व परिवर्तनकारी निर्णय लिए गए।
इन निर्णयों ने न केवल समाज की दिशा बदली, बल्कि ग्रामीण भारत को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी अहम भूमिका निभाई।
तर्कशीलता और प्रभावी वक्तृत्व शैली के धनी थे पंत
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि पंत जी अपने समय के अत्यंत प्रभावशाली वक्ता थे। उनकी तर्कशक्ति और विचारों की स्पष्टता ने उन्हें भारत की राजनीति में विशेष स्थान दिलाया।








