
- राहुल गांधी की नागरिकता पर उठे नए सवाल, इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई जारी
- केंद्र सरकार को 10 दिन में देना होगा जवाब, राहुल गांधी की नागरिकता पर सस्पेंस
- भा.ज.पा. कार्यकर्ता की याचिका पर लखनऊ हाईकोर्ट की बड़ी टिप्पणी
लखनऊ। राहुल गांधी की भारतीय नागरिकता को लेकर कांग्रेस नेता के खिलाफ दायर याचिका पर सोमवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में सुनवाई हुई। कोर्ट ने केंद्र सरकार से 10 दिन के भीतर यह स्पष्ट करने का निर्देश दिया कि क्या राहुल गांधी ब्रिटिश नागरिक हैं।
भारतीय जनता पार्टी (भा.ज.पा.) के कार्यकर्ता विग्नेश शिशिर द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने केंद्र सरकार की पेश की गई स्टेटस रिपोर्ट को अपर्याप्त मानते हुए और स्पष्ट जवाब की मांग की। कोर्ट ने कहा कि यह मामला राष्ट्रीय महत्व का है और इसमें किसी भी प्रकार की देरी को स्वीकार नहीं किया जा सकता। केंद्र सरकार ने इस मामले में अतिरिक्त समय की मांग की है और अगली सुनवाई 5 मई को निर्धारित की गई है।
इससे पहले, 24 मार्च को भी लखनऊ हाईकोर्ट में सुनवाई हुई थी। जस्टिस एआर मसूदी और जस्टिस अजय कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ ने राज्य सरकार को चार सप्ताह के भीतर स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया था, जिसके बाद सरकार ने आठ सप्ताह का समय मांगा था। इसके बाद 21 अप्रैल को सुनवाई की तारीख तय की गई थी।
राहुल गांधी की नागरिकता पर उठे सवाल- इस मामले की शुरुआत 1 जुलाई, 2024 को हुई थी, जब कर्नाटक के वकील और भाजपा नेता एस विग्नेश शिशिर ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। शिशिर ने आरोप लगाया था कि राहुल गांधी के पास ब्रिटिश नागरिकता है, और इसके समर्थन में उन्होंने ब्रिटिश सरकार के 2022 के एक गोपनीय मेल का हवाला दिया।








