
- भारत-चीन वार्ता, क्या नया हो सकता है इस रणनीतिक संवाद से?
- आतंकवाद पर संयुक्त मोर्चा, चीन और भारत का क्या है संदेश?
- पहलगाम हमला, भारत की सुरक्षा रणनीति और चीन का समर्थन
बीजिंग। भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी के बीच हुई टेलीफोन वार्ता में भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़े तनाव पर चर्चा हुई। दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि नई दिल्ली और इस्लामाबाद को बातचीत के जरिए मतभेद सुलझाने चाहिए और स्थायी युद्धविराम हासिल करना चाहिए।
डोभाल ने कहा – “युद्ध विकल्प नहीं, लेकिन आतंकवाद पर कार्रवाई जरूरी”
बातचीत के दौरान एनएसए डोभाल ने स्पष्ट किया कि “युद्ध भारत का विकल्प नहीं है, लेकिन पहलगाम हमले के बाद आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई आवश्यक थी।” उन्होंने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकवादी हमले का जिक्र किया, जिसमें भारतीय सुरक्षा बलों को भारी नुकसान हुआ था।
वांग यी ने इस हमले की “कड़ी निंदा” करते हुए कहा कि चीन सभी प्रकार के आतंकवाद का विरोध करता है।
चीन ने पाकिस्तान से भी की बात, शांति का आग्रह
चीनी विदेश मंत्री ने पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री मोहम्मद इशाक डार से भी बातचीत की। यह वार्ता ऐसे समय हुई है जब भारत ने 7 मई को पाकिस्तान-अधिकृत कश्मीर (PoK) में आतंकी ठिकानों पर सर्जिकल स्ट्राइक की थी, जिसमें 26 लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया था।
वांग यी ने डोभाल से कहा कि “भारत और पाकिस्तान को शांत और संयम बरतना चाहिए, बातचीत से मतभेद सुलझाने चाहिए और स्थिति को और न बढ़ाएं।” उन्होंने कहा कि चीन दोनों देशों के बीच “स्थायी युद्धविराम” का समर्थन करता है, जो क्षेत्रीय शांति के लिए जरूरी है।
“भारत-पाकिस्तान चीन के पड़ोसी, दूर नहीं हो सकते”
चीनी विदेश मंत्री ने यह भी कहा कि “भारत और पाकिस्तान चीन के पड़ोसी हैं और इन्हें दूर नहीं किया जा सकता।” उन्होंने जोर देकर कहा कि एशिया में शांति और स्थिरता बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है।
इस पर डोभाल ने जवाब दिया कि पहलगाम हमले से भारत को गंभीर नुकसान हुआ है और आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई अपरिहार्य थी।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
चीन ने अपनी तटस्थ भूमिका निभाते हुए दोनों देशों से संवाद बढ़ाने का आग्रह किया है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी भारत-पाकिस्तान तनाव को लेकर चिंतित है और शांतिपूर्ण समाधान का समर्थन कर रहा है।
आगे की राह: दोनों देशों के बीच तनाव कम करने के लिए कूटनीतिक स्तर पर बातचीत जारी है, लेकिन आतंकवाद पर भारत की जीरो टॉलरेंस पॉलिसी से स्पष्ट है कि वह सुरक्षा चुनौतियों पर कड़ी प्रतिक्रिया देगा।








