
- उपराष्ट्रपति ने राज्यपाल की पुस्तक का किया विमोचन
- उपराष्ट्रपति धनखड़ ने पीएम मोदी की लीडरशिप को सराहा
- धनखड़ ने हल्के अंदाज में साझा की अपनी चुनौतियाँ
लखनऊ। उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने गुरुवार को लखनऊ में उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की नई किताब ‘चुनौतियां मुझे पसंद हैं’ का विमोचन किया। इस दौरान उन्होंने आतंकी हमलों का जिक्र करते हुए कहा कि पहलगाम में चुनौती मिली है, लेकिन देश के पास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जैसा “डायनामिक नेता” है, जो चुनौतियों को अवसर में बदल देते हैं।
धनखड़ ने राज्यपाल से मांगा ‘गुरुमंत्र’
उपराष्ट्रपति ने हास्यपूर्ण अंदाज में कहा, “राज्यपाल महोदया, मेरे लिए घर में एक बड़ी चुनौती है। उसे पार करने के लिए मैं राजभवन में भोजन के दौरान आपसे गुरुमंत्र लूंगा। अगर आपने मुझे कोई मंत्र नहीं दिया, तो मुझे एकलव्य बनना पड़ेगा।” उन्होंने आनंदीबेन पटेल की सराहना करते हुए कहा कि उनका नाम ही काफी है और उन्होंने अपनी किताब का विमोचन मजदूर दिवस (1 मई) के दिन किया, जो उनके जन-समर्पण को दर्शाता है।
“मैं अहमदाबादी हूं, किताब फ्री में नहीं मिलेगी” – आनंदीबेन
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि इस किताब को लिखने में उनके परिवार का बड़ा योगदान रहा। उन्होंने हंसते हुए कहा, “इसकी कीमत 500 रुपये रखी है, क्योंकि मैं अहमदाबादी हूं। यह फ्री में नहीं मिलेगी।” उन्होंने गुजराती मितव्ययिता का उदाहरण देते हुए कहा, “हम एक ही कप में तीन लोग चाय पीते हैं।”
योगी ने किताब को ‘ग्रंथ’ बताया
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किताब की तारीफ करते हुए कहा, “यह कोई साधारण पुस्तक नहीं, बल्कि एक ग्रंथ है, जिसमें राज्यपाल महोदया के जीवन का सार समाहित है।”
धनखड़ ने न्यायपालिका-विधायिका संबंधों पर दिए महत्वपूर्ण संकेत
उपराष्ट्रपति ने 1960 के दशक में न्यायपालिका और विधायिका के बीच टकराव का जिक्र करते हुए कहा कि संविधान के मूल ढांचे को बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने कहा, “जैसे विधायिका को न्यायिक फैसले नहीं करने चाहिए, वैसे ही न्यायपालिका को विधायिका के काम में दखल नहीं देना चाहिए।” उन्होंने “अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता” को लोकतंत्र का आधार बताया, लेकिन चेतावनी दी कि “जब कोई खुद को सही और दूसरों को गलत मानने लगे, तो यह स्वतंत्रता विकृत हो जाती है।”
लखनऊ दौरे का कार्यक्रम
धनखड़ सुबह बख्शी का तालाब एयरफोर्स स्टेशन पहुंचे, जहां राज्यपाल और सीएम योगी ने उनका स्वागत किया। इसके बाद वे डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम टेक्निकल यूनिवर्सिटी (AKTU) पहुंचे, जहां किताब का विमोचन हुआ। दोपहर में वे राजभवन में भोजन के बाद अपने सचिव के पिता डॉ. एससी गुप्ता से मिलने गए।








