
- क्या ड्रोन तकनीक ने बढ़ाया भारत-पाक संघर्ष का खतरा
- ट्रम्प की मध्यस्थता: शांति की पहल या राजनीतिक दांव
- सीजफायर के बावजूद रातभर क्यों गूंजते रहे धमाके
नई दिल्ली। 10 मई की शाम 5 बजे भारत और पाकिस्तान के बीच चार दिनों तक चले तनावपूर्ण संघर्ष के बाद युद्धविराम लागू हुआ। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर इसकी घोषणा की, जिसके बाद दोनों देशों ने भी इसकी पुष्टि की। इस घटनाक्रम पर दुनिया भर के प्रमुख मीडिया संस्थानों ने अपनी प्रतिक्रियाएं दीं।
1. न्यूयॉर्क टाइम्स: “खतरा अभी टला नहीं”
NYT ने कहा कि भले ही दोनों देश युद्ध के कगार से पीछे हट गए हों, लेकिन तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। अखबार ने लिखा, “इस संघर्ष में नई सैन्य तकनीकों का इस्तेमाल हुआ, जिसमें ड्रोन हमलों की बढ़ती भूमिका देखी गई। आने वाले समय में और भी ऐसी झड़पें हो सकती हैं।”
2. वॉशिंगटन पोस्ट: “अमेरिका ने युद्धविराम में मदद की”
इस अखबार ने ट्रम्प प्रशासन को श्रेय देते हुए लिखा कि अमेरिका ने दोनों देशों के बीच युद्धविराम कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। हालांकि, सवाल उठाया गया कि “क्या यह शांति स्थायी रहेगी?”
3. सीएनएन: “दशकों का सबसे भीषण संघर्ष रुका”
सीएनएन ने कहा कि यह संघर्ष विराम दो परमाणु शक्ति संपन्न देशों के बीच पिछले कई दशकों के सबसे गंभीर तनाव को रोकने में कामयाब रहा। अखबार ने पुलवामा हमले के बाद बढ़े तनाव और 7 मई से शुरू हुए सैन्य संघर्ष का जिक्र किया, जिसमें दर्जनों लोग मारे गए।
4. फ्रांस 24: “रातभर झड़पों के बावजूद युद्धविराम कायम”
फ्रांसीसी मीडिया ने बताया कि 10 मई की रात सीमा पर कुछ झड़पें हुईं, लेकिन युद्धविराम अभी भी लागू है। उन्होंने इसे पिछले 30 सालों का सबसे भीषण सैन्य टकराव बताया, जिसमें मिसाइल और ड्रोन हमलों का इस्तेमाल हुआ।
5. द गार्जियन: “यदि युद्धविराम टिका, तो नए प्रकार का संघर्ष देखने को मिलेगा”
ब्रिटिश अखबार ने कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच दशकों पुरानी दुश्मनी अभी खत्म नहीं हुई है। उनके विश्लेषण के अनुसार, “अगर यह युद्धविराम टिकता है, तो अगला संघर्ष ‘नैरेटिव वॉर’ (सूचना युद्ध) के रूप में सामने आ सकता है।”








