कौन हैं अहमद अल-शरा? आतंकी से राष्ट्रपति बनने तक का सफर

  • कभी आतंकी, अब राष्ट्रपति: अल-शरा की पहचान में बदलाव की कहानी
  • क्या ट्रम्प के फैसले से बदलेगा मिडिल ईस्ट का भविष्य?
  • कैसे 84% तक सिमट गई थी सीरियाई अर्थव्यवस्था?

रियाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने मंगलवार को एक बड़ा फैसला लेते हुए सीरिया पर लगे सभी अमेरिकी प्रतिबंधों को हटाने का आदेश दिया। उन्होंने कहा कि यह कदम सीरिया को फिर से विकास के रास्ते पर ले जाने का अवसर देगा।

प्रतिबंध हटाने के अगले ही दिन ट्रम्प ने सऊदी अरब की राजधानी रियाद में सीरिया के राष्ट्रपति अहमद अल-शरा से मुलाकात की। यह मुलाकात इसलिए भी सुर्खियों में है क्योंकि अल-शरा कभी अमेरिका की मोस्ट वांटेड आतंकियों की लिस्ट में शामिल थे। वह पूर्व में अलकायदा की सीरियाई शाखा के प्रमुख रह चुके हैं और अबु मोहम्मद अल-जुलानी के नाम से जाने जाते थे।

37 मिनट चली मुलाकात, ट्रम्प बोले- अल-शरा युवा और आकर्षक हैं

रियाद में दोनों नेताओं की 37 मिनट की बातचीत हुई। ट्रम्प ने कहा कि उन्होंने अल-शरा से इजराइल से रिश्तों को सामान्य करने और विदेशी आतंकियों को देश से निकालने की बात की है। अल-शरा ने भी ट्रम्प की प्रशंसा करते हुए कहा कि वह मिडिल ईस्ट में स्थायी शांति ला सकते हैं।

कैसे हटे प्रतिबंध: ट्रम्प ने लिया सऊदी और तुर्की से परामर्श

ट्रम्प ने बताया कि उन्होंने प्रतिबंध हटाने का निर्णय सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और तुर्की के राष्ट्रपति तैयप एर्दोगन से बातचीत के बाद लिया। दोनों नेताओं ने इस कदम का खुला समर्थन किया।

बता दें, अमेरिकी संसद ने 2019 में ‘सीजर एक्ट’ के तहत सीरिया पर सख्त प्रतिबंध लगाए थे, जिनमें राष्ट्रपति को राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर प्रतिबंध हटाने का अधिकार भी दिया गया था।

क्या थे प्रतिबंध और उनका असर?

1. आर्थिक लेनदेन पर रोक:
सीरिया अमेरिकी डॉलर में लेनदेन नहीं कर सकता था, जिससे वह वैश्विक व्यापार से कट गया था।

2. तेल और गैस उद्योग पर बैन:
सीरिया की कमाई का मुख्य स्रोत बंद हो गया। विदेशी कंपनियों के लिए निवेश पर पाबंदी थी।

3. बैंकिंग नेटवर्क से बाहर:
सीरियाई बैंक SWIFT सिस्टम से बाहर थे, जिससे वैश्विक वित्तीय लेनदेन असंभव हो गया था।

4. सैन्य और तकनीकी आपूर्ति पर प्रतिबंध:
सीरिया को हथियार, ड्रोन, जीपीएस, इंजन जैसी तकनीक नहीं मिल पा रही थी।

5. ‘सीजर एक्ट’ के तहत वैश्विक प्रतिबंध:
सीरिया से व्यापार करने वाली विदेशी कंपनियों पर भी अमेरिकी कार्रवाई का खतरा था, जिससे एनजीओ तक ने काम बंद कर दिया था।

84% सिकुड़ी इकोनॉमी, 90% आबादी गरीबी में

2010 में जहां सीरिया की GDP 60 अरब डॉलर थी, वहीं 2022 में यह घटकर 23.63 अरब डॉलर रह गई। अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण सीरिया की 90% जनता गरीबी रेखा से नीचे चली गई और देश में सिर्फ 2 घंटे बिजली उपलब्ध हो पाती थी।

तेल पर लगे बैन से सीरिया को 107 अरब डॉलर (₹9.1 लाख करोड़) का नुकसान हुआ। इससे देश में कैप्टागन जैसे ड्रग्स की तस्करी और अपराध बढ़े। कई रिपोर्टों में दावा किया गया कि इस तस्करी में सरकारी अधिकारी और सेना तक शामिल थे।

अल-शरा की तस्करी पर सख्ती, शरिया कानून का हवाला

सीरिया के राष्ट्रपति बने अहमद अल-शरा ने ड्रग्स और तस्करी पर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि यह न केवल कानून के खिलाफ है, बल्कि देश के भविष्य के लिए भी घातक है। दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जा रही है।]

प्रतिबंध हटते ही 60% मजबूत हुआ सीरियाई पाउंड

ट्रम्प की घोषणा के बाद सिर्फ एक दिन में सीरियाई मुद्रा की कीमत 60% तक बढ़ गई। पहले जहां ब्लैक मार्केट में एक अमेरिकी डॉलर के बदले 15,000 सीरियाई पाउंड मिलते थे, अब यह घटकर 10,000 हो गया है। अब सीरिया में व्यापार और निवेश की संभावनाएं खुल गई हैं। खाड़ी देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों से सहयोग मिलने की उम्मीद है, जिससे देश की जनता को राहत मिल सकती है।

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