
- Lucknow की स्पेशल ATS कोर्ट का बड़ा फैसला
- छांगुर बाबा की डिस्चार्ज अर्जी खारिज, ट्रायल का रास्ता साफ
- Enforcement Directorate और Anti-Terrorism Squad की चार्जशीट में गंभीर आरोप
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी Lucknow स्थित स्पेशल एटीएस कोर्ट ने छांगुर बाबा को बड़ा झटका देते हुए उनकी डिस्चार्ज अर्जी खारिज कर दी है। इस फैसले के बाद अब उनके खिलाफ ट्रायल का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है।
जांच एजेंसियों—Enforcement Directorate (ईडी) और Anti-Terrorism Squad (एटीएस)—ने कोर्ट में विस्तृत चार्जशीट दाखिल की है, जिसमें छांगुर बाबा और उनके सहयोगियों पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
ईडी ने करीब 1400 पन्नों की चार्जशीट में फंडिंग, बैंक ट्रांजैक्शन, संपत्ति खरीद और आरोपियों के बीच संबंधों का विस्तृत ब्योरा दिया है। एजेंसियों का दावा है कि आरोपी एक संगठित नेटवर्क के रूप में काम कर रहे थे, जिसका उद्देश्य बड़े पैमाने पर धर्मांतरण गतिविधियों को अंजाम देना था।
जांच में सबसे बड़ा खुलासा विदेशी फंडिंग को लेकर हुआ है। एजेंसियों के अनुसार, वर्ष 2015 से 2024 के बीच 100 करोड़ रुपये से अधिक का लेन-देन हुआ। यह रकम सऊदी अरब और दुबई समेत खाड़ी देशों से भारत लाई गई।
जांच में यह भी सामने आया कि इस फंड को अलग-अलग खातों और माध्यमों से ट्रांसफर किया गया, ताकि इसकी असली पहचान छिपाई जा सके। एजेंसियों ने मनी ट्रेल की गहन जांच कर इस पूरे नेटवर्क का खुलासा किया है।
अधिकारियों का कहना है कि इस पैसे का इस्तेमाल कथित तौर पर धर्मांतरण गतिविधियों को बढ़ावा देने, लोगों को प्रलोभन देने और नेटवर्क को मजबूत करने में किया गया।
जमीन खरीदकर खड़ा किया गया नेटवर्क
ईडी की जांच में यह भी सामने आया है कि सह-आरोपी नवीन और उसकी पत्नी नीतू ने इस फंड का इस्तेमाल कई जिलों में जमीन खरीदने के लिए किया।









