40 साल बाद भी मुआवजा क्यों नहीं?

लखनऊ में किसानों का प्रदर्शन क्यों तेज, प्रशासन पर क्या आरोप

  • Lucknow में नगर निगम जोन-4 कार्यालय का घेराव
  • Bharatiya Kisan Union Rashtravad का प्रदर्शन
  • 1984 से मुआवजे का मुद्दा अब तक अधूरा
  • Lucknow Development Authority पर वादाखिलाफी के आरोप

लखनऊ। राजधानी Lucknow में किसानों का गुस्सा एक बार फिर सड़कों पर नजर आया। Bharatiya Kisan Union Rashtravad के बैनर तले किसानों ने गोमती नगर स्थित नगर निगम के जोन-4 कार्यालय का घेराव कर जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान किसानों ने जिला प्रशासन और Lucknow Development Authority (एलडीए) के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि उन्हें पिछले 40 वर्षों से मुआवजे के नाम पर गुमराह किया जा रहा है। किसानों के मुताबिक, उनकी जमीन वर्ष 1984 में एलडीए द्वारा अधिग्रहित की गई थी, लेकिन आज तक उन्हें उचित मुआवजा और वादे के मुताबिक सुविधाएं नहीं मिल सकी हैं।

किसानों ने बताया कि वे पिछले 150 दिनों से Chinhat क्षेत्र में धरना दे रहे हैं और समय-समय पर विभिन्न विभागों के कार्यालयों का घेराव भी कर चुके हैं। इसके बावजूद उनकी मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे किसान नेता Ashok Yadav ने कहा कि “अन्नदाता का कोई सम्मान नहीं रह गया है। पहले 84 पैसे प्रति वर्ग फुट के हिसाब से मुआवजा तय किया गया था, जिसे बाद में बढ़ाकर 2.50 रुपये और फिर 4.60 रुपये किया गया। 2016 में कोर्ट ने भी 4.60 रुपये के हिसाब से मुआवजा देने का आदेश दिया, लेकिन एलडीए अब भी धनराशि की कमी का हवाला देकर भुगतान नहीं कर रहा।”

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