
- शंकराचार्य ने मोरारी बापू को बताया “रावण प्रवृत्ति” वाला
- दर्शन और कथा को बताया शास्त्रविरोधी
- सीएम योगी ने जताया शोक, विरोध कर रहे संतों को नहीं मिला संतोष
वाराणसी। कथा वाचक मोरारी बापू द्वारा पत्नी के निधन के बाद काशी में दर्शन-पूजन और कथा करने को लेकर उठे विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा। भले ही मोरारी बापू ने काशी के संतों और विद्वानों से क्षमा मांग ली हो, लेकिन अब ज्योर्तिमठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए बापू पर शास्त्रविरोधी आचरण का आरोप लगाया है।
‘मोरारी बापू की प्रवृत्ति रावण जैसी’ – शंकराचार्य
शंकराचार्य ने सोमवार को वीडियो संदेश जारी कर मोरारी बापू के आचरण को “रावण जैसी प्रवृत्ति” करार दिया। उन्होंने कहा, “सूतक में कथा और पूजन करना शास्त्र के विरुद्ध है। मोरारी बापू ने बाबा विश्वनाथ के दर्शन और जलाभिषेक किया, जो अशास्त्रीय है। अगर उन्होंने पश्चाताप नहीं किया, तो यमराज उन्हें दंड देंगे।”
‘शास्त्र दिखाएं, केवल परंपरा की बात न करें’
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने मोरारी बापू से शास्त्रगत प्रमाण मांगते हुए कहा, “वे यह स्पष्ट करें कि सूतक काल में कथा और दर्शन किस शास्त्र में मान्य हैं। केवल यह कह देना कि हम वैष्णव साधु हैं और हम पर सूतक लागू नहीं होता, पर्याप्त नहीं है। सनातन धर्म में शास्त्र सर्वोपरि है, न कि व्यक्तिगत मान्यता।”
स्थानीय लोगों ने किया विरोध, पुतला बनाकर किया दफन
सोमवार को काशी के मछोदरी इलाके में स्थानीय लोगों ने मोरारी बापू के विरोध में पुतला बनाकर दफन कर सांकेतिक विरोध जताया। रविवार को रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में कथा के पहले दिन भी विरोध में पुतला दहन किया गया था।








