वाराणसी अर्बन रोपवे प्रोजेक्ट में शाही नाले ने डाली अड़चन

  • देश के पहले अर्बन रोपवे प्रोजेक्ट की डेडलाइन बढ़ना तय
  • गोदौलिया में खुदाई के दौरान शाही सुरंगनुमा नाला मिला
  • नाले की दीवार टूटने से 6 इमारतों पर गिरने का खतरा

वाराणसी। देश के पहले अर्बन रोपवे ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट को लेकर वाराणसी से बड़ी खबर सामने आई है। गोदौलिया क्षेत्र में पिलर-29 की खुदाई के दौरान जमीन के 25 फीट नीचे बह रहे ‘शाही नाले’ के कारण निर्माण कार्य को रोक दिया गया है। इससे प्रोजेक्ट की तय डेडलाइन अगस्त 2025 से आगे बढ़ना तय माना जा रहा है।

दरअसल, नेशनल हाईवे लॉजिस्टिक मैनेजमेंट लिमिटेड (NHLML) की पाइलिंग मशीन खुदाई के दौरान अचानक जमीन में धंस गई और पानी ऊपर आ गया। जांच में पता चला कि नीचे एक शाही सुरंगनुमा नाला बह रहा है, जिसकी जानकारी NHAI को पहले से नहीं थी। इससे नाले की दीवार भी टूट गई, जिससे आस-पास की 6 इमारतों के गिरने का खतरा पैदा हो गया है। प्रशासन ने इन इमारतों को खाली करने का नोटिस जारी कर दिया है।

प्रोजेक्ट ब्लूप्रिंट में नहीं था शाही नाला

NHAI अधिकारियों ने नगर निगम और जलकल विभाग पर नाराजगी जताई है कि इतने बड़े ऐतिहासिक नाले की जानकारी उन्हें नहीं दी गई। यदि जानकारी होती, तो पिलर के लिए इस स्थान का चयन ही नहीं किया जाता। अफसरों का कहना है कि जमीन के नीचे कंपन होने से आसपास के मकानों की नींव पर खतरा पैदा हो गया है, इसलिए काम को फिलहाल रोक दिया गया है।

शाही नाले का इतिहास: हाथी भी निकल सकते थे एक साथ

शाही नाला या शाही सुरंग का इतिहास मुगलकाल से जुड़ा है। बताया जाता है कि इसे इस तरह बनाया गया था कि इसके अंदर से दो हाथी एक साथ गुजर सकते थे। अंग्रेजों ने 1827 में बनारस की सीवर व्यवस्था सुधारने के लिए इसी सुरंग का उपयोग किया। लखौरी ईंट और बरी मसाला से बनी यह सुरंग 24 किलोमीटर लंबी बताई जाती है और अस्सी से कोनिया तक फैली है।

ग्राउंड जीरो से—स्थानीय लोगों की व्यथा:

अभिषेक कुमार, इलेक्ट्रॉनिक दुकानदार

“25 साल से दुकान चला रहा हूं, अचानक कहा जा रहा है कि होटल गिर सकता है, दुकान खाली करो। हमारा सारा सामान हटाया जा रहा है। बिजनेस बर्बाद हो गया, अब क्या करेंगे, महादेव ही जानें।”

नरेंद्र केसरी, ठंडाई दुकानदार

“2004 से दुकान चला रहा हूं, कभी नहीं पता चला कि दुकान के नीचे से नाला गया है। बिना नक्शा देखे खुदाई शुरू करना लापरवाही है। अब धमक और डर दोनों सता रहे हैं।”

अशोक कुमार, स्थानीय निवासी

“मेरा घर नाले से 50 मीटर दूर है। बारिश के मौसम में इतनी गहराई तक खुदाई से मकान ढह सकता है। हमारी नींव महज 5 फीट गहराई में है, यह बहुत खतरनाक है।”

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