40 साल से न्याय की आस में खड़े रिटायर्ड सिपाही बी.सी. श्रीवास्तव

लखनऊ। रिटायर्ड सिपाही बी.सी. श्रीवास्तव की आंखों में अब उम्र का असर साफ झलकने लगा है, लेकिन दिल में इंसाफ की उम्मीद अब भी बाकी है। गुरुवार को वो लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) की जनता अदालत में अपनी पुरानी फरियाद लेकर एक बार फिर पहुंचे।

बी.सी. श्रीवास्तव ने बताया कि साल 1985 में उजरियांव स्थित उनकी जमीन सरकार द्वारा अधिग्रहित कर ली गई थी। बदले में दूसरी जगह जमीन देने का वादा किया गया था, लेकिन आज तक उन्हें न जमीन मिली, न मुआवजा। शुरुआत में उन्हें व्योम योजना के तहत प्लॉट देने की बात हुई, मगर बाद में योजना ही रद्द कर दी गई।

भावुक होकर उन्होंने कहा, “40 साल से दफ्तरों के चक्कर काटते-काटते जिंदगी बीत गई। मेरी पत्नी हर बार मेरे साथ जाती थीं, अब वो नहीं रहीं। पर मैं अब भी उसी लाइन में खड़ा हूं।”

जनता अदालत में कई और ऐसे लोग पहुंचे, जो वर्षों से लटके अपने मामलों का समाधान चाहते हैं। लेकिन उन्हें हर बार सिर्फ आश्वासन ही मिला।

ऐसा ही एक मामला रिटायर्ड इंस्पेक्टर इंद्र कुमार पांडेय का है, जो 1985 से अलीगंज योजना में मिले फ्लैट की रजिस्ट्री के लिए LDA के चक्कर लगा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अफसर कभी फाइल के गायब होने का बहाना बनाते हैं, तो कभी कहते हैं कि फाइल जल गई है।

इन मामलों ने LDA की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जनता अदालत में पहुंचे कई फरियादियों का कहना है कि उन्हें सिर्फ तारीख़ पर तारीख़ मिलती है, लेकिन न्याय नहीं।

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