
अम्बेडकरनगर। भारतीय जनता पार्टी की महिला मोर्चा की जिलाध्यक्ष रिंकल सिंह इन दिनों खुद को न्याय के लिए संघर्षरत पाती नजर आ रही हैं। लोहिया भवन के सामने तीसरे दिन भी वह अपने मासूम बच्चे को गोद में लेकर धरने पर बैठीं रहीं। भवन के अंदर जहां भाजपा आपातकाल की 50वीं वर्षगांठ पर “काला दिवस” मना रही थी, वहीं बाहर पार्टी की महिला पदाधिकारी प्रशासन और संगठन के रवैये के खिलाफ आवाज बुलंद करती दिखीं।
भावुक हुईं रिंकल सिंह, पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल
धरना स्थल पर रिंकल सिंह ने कहा, “अगर मुझे ही न्याय नहीं मिलेगा तो आम जनता क्या उम्मीद करेगी? मुझे पुलिस ने जबरन गाड़ी में बैठाया, घंटों घुमाया और अब केस को कमजोर किया जा रहा है।” उन्होंने कहा कि उनका मामला जानलेवा हमले, उत्पीड़न और धमकी से जुड़ा है, लेकिन पुलिस ने इसे शांतिभंग के मामूली मामले की तरह लिया।
रिंकल सिंह ने आरोप लगाया कि भीटी सर्किल के सीओ और महरुआ थाना पुलिस स्थानीय प्रभावशाली लोगों के दबाव में काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि घटना के मुख्य आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं और पुलिस उन्हें गिरफ्तार करने के बजाय दिखावटी कार्रवाई कर रही है।
पार्टी नेतृत्व पर भी साधा निशाना
रिंकल सिंह ने पार्टी के जिला अध्यक्ष त्र्यंबक तिवारी पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा, “अगर वे मुझे न्याय नहीं दिला सकते तो उन्हें पद छोड़ देना चाहिए। मैं भाजपा महिला मोर्चा की जिलाध्यक्ष हूं, क्या मेरा सम्मान केवल मंचों तक सीमित है?”
गांव के विवाद से उपजा विवाद
पूरा मामला उनके गांव से जुड़ा है, जहां दबंगों ने कथित रूप से रिंकल सिंह के पति पर हमला किया, घर के सामने जानबूझकर जलभराव कर दिया और परिवार को जान से मारने की धमकी दी। रिंकल ने बताया कि पुलिस ने आरोपियों में से एक को गिरफ्तार कर सिर्फ खानापूरी की








