सुप्रीम कोर्ट में वकील को जस्टिस वर्मा को सरनेम से बुलाना पड़ा महंगा

  • लुटियंस दिल्ली स्थित जस्टिस वर्मा के घर में आग, मिले जले हुए नोटों के बोरे
  • रिपोर्ट में 15 करोड़ कैश की बात, 3 सदस्यीय समिति ने की जांच
  • रिपोर्ट में जस्टिस वर्मा को दोषी बताते हुए महाभियोग की सिफारिश

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को उस समय असहज स्थिति उत्पन्न हो गई जब एक वकील ने अदालत में इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा को केवल उनके ‘सरनेम’ से संबोधित किया। इस पर चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की पीठ में बैठे जस्टिस बीआर गवई ने कड़ी आपत्ति जताई और वकील मैथ्यूज नेदुम्परा को फटकार लगाते हुए मर्यादा में रहने की नसीहत दी।

चीफ जस्टिस गवई ने कहा – “क्या वे आपके दोस्त हैं? वे अब भी एक जज हैं। आप उन्हें कैसे इस तरह संबोधित कर सकते हैं? थोड़ी मर्यादा रखिए। वे एक विद्वान जज हैं।” हालांकि, वकील ने इसका जवाब देते हुए कहा – “मुझे नहीं लगता कि उन्हें इतनी इज्जत देनी चाहिए।” इस पर CJI ने सख्ती से कहा, “प्लीज, कोर्ट को आदेश मत दीजिए।”

सुप्रीम कोर्ट ने इसके साथ ही वकील द्वारा दाखिल उस याचिका को भी खारिज कर दिया जिसमें जस्टिस वर्मा के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई थी।

जस्टिस वर्मा का कैश कांड क्या है?

14 मार्च की रात दिल्ली के लुटियंस ज़ोन स्थित जस्टिस वर्मा के घर में आग लगी थी। जब दमकल विभाग वहां पहुंचा तो स्टोर रूम से 500-500 रुपये के जले हुए नोटों के बोरे बरामद हुए। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि वहां करीब 15 करोड़ रुपये नकद मौजूद था, जिसका एक हिस्सा जल चुका था। उस वक्त जस्टिस वर्मा दिल्ली हाई कोर्ट में पदस्थ थे। बाद में उनका तबादला इलाहाबाद हाई कोर्ट कर दिया गया।

इस घटना के बाद तत्कालीन CJI संजीव खन्ना ने एक तीन सदस्यीय जांच समिति बनाई, जिसमें पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस शील नागू, हिमाचल हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस जीएस संधवालिया और कर्नाटक हाई कोर्ट की जज अनु शिवरामन शामिल थीं।

जांच रिपोर्ट में क्या निकला?

4 मई को सौंपी गई 64 पेज की जांच रिपोर्ट में जस्टिस वर्मा और उनके परिवार द्वारा स्टोर रूम पर नियंत्रण होने की बात सामने आई। जांच में 55 गवाहों से पूछताछ की गई और उनके आधिकारिक आवास का निरीक्षण किया गया।

रिपोर्ट में कहा गया कि जस्टिस वर्मा के खिलाफ लगे आरोप “गंभीर और तथ्यात्मक रूप से पर्याप्त” हैं, जिनके आधार पर उनके खिलाफ महाभियोग चलाया जाना चाहिए।

इसके बाद CJI खन्ना ने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को पत्र भेजकर महाभियोग की सिफारिश की

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