भारत ने अमेरिका की आपत्ति के बावजूद रूस से तेल आयात जारी रखा

नई दिल्ली। भारत ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आपत्तियों के बावजूद रूस से कच्चा तेल (क्रूड ऑयल) खरीदना जारी रखा है। अक्टूबर 2025 में भारत ने रूस से 2.5 बिलियन डॉलर (करीब ₹22.17 हजार करोड़) मूल्य का तेल आयात किया, जिससे वह दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा रूसी तेल खरीदार बन गया है। यह जानकारी हेलसिंकी स्थित सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (CREA) की रिपोर्ट में दी गई है।

रूस से कुल फॉसिल फ्यूल आयात में भारत का आंकड़ा 3.1 बिलियन डॉलर (करीब ₹27.49 हजार करोड़) पहुंच गया है, जबकि चीन ने 5.8 बिलियन डॉलर (करीब ₹51.44 हजार करोड़) का आयात किया। चीन ने रूस से सबसे ज्यादा कोयला खरीदा, कुल 760 मिलियन डॉलर का, जबकि भारत ने 351 मिलियन डॉलर का कोयला और 222 मिलियन डॉलर के ऑयल प्रोडक्ट आयात किए।

रूसी ऑयल प्रोडक्ट्स का सबसे बड़ा खरीदार तुर्की रहा, जिसने 957 मिलियन डॉलर का आयात किया, जिसमें लगभग आधा डीजल था। यूरोपीय यूनियन ने सबसे ज्यादा गैस खरीदी, जिसमें अक्टूबर में 824 मिलियन डॉलर मूल्य की रूसी LNG और पाइपलाइन गैस शामिल थी।

पश्चिमी देश भारत और चीन पर रूस से तेल खरीद पर दबाव डाल रहे हैं, क्योंकि उनका तर्क है कि इससे यूक्रेन में रूस के युद्ध को फंडिंग मिल रही है। अमेरिका ने रूस के दो प्रमुख तेल निर्यातक, रोसनेफ्ट और लुकोइल पर प्रतिबंध लगाए हैं। इसका असर दिसंबर के आयात आंकड़ों में दिखाई दे सकता है।

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