रिश्तेदारी का झांसा… और गुरुजी हो गए ठगी के शिकार

अंबेडकरनगर। उम्र और अनुभव हमेशा सुरक्षा की गारंटी नहीं होते ।  यह कड़वा सच बुधवार को तब सामने आया जब आलापुर के ख्वाजे बड़ापुर निवासी सेवानिवृत्त शिक्षक कोदईराम यादव टप्पेबाज गिरोह की चाल में फंस गए।बैंक से निकाले गए मेहनत की कमाई के 80 हजार रुपये, कुछ ही मिनट में “रिश्तेदारी के झूठे भरोसे” के कारण 50 हजार में बदल गए।

कोदईराम यादव बुधवार सुबह लगभग 10 बजे बैंक ऑफ बड़ौदा, रामनगर शाखा से 80 हजार रुपये निकालकर जैसे ही बाहर निकले, एक अजनबी युवक विनम्रता और परिचय के साथ सामने आया। बातचीत में उसने खुद को रिश्तेदार बताते हुए सहजता से गुरुजी के साथ चल पड़ा।
भरोसा, उम्र और संबंधों का ताना-बाना—यही वह जगह होती है जहां ठग सबसे आसानी से प्रवेश करते हैं। यही हुआ।

युवक शिक्षक के साथ बाइक पर बैठ गया। करीब 10:30 बजे बहरामपुर पेट्रोल पंप के पास उसने बाइक रुकवाई और बातचीत के बहाने रुपये की मांग की।
शिक्षक, विश्वास और अपनापन में फंसकर अपनी जेब में रखे 50 हजार रुपये दे बैठे।
पैसा मिलते ही युवक ऐसे गायब हुआ कि शिक्षक को कुछ समझ में आते-आते वह काफी दूर जा चुका था।तभी एहसास हुआ।रिश्तेदारी नहीं, ठगी थी। भरोसा नहीं, जाल था।

पीड़ित कोदईराम यादव ने थानाध्यक्ष आलापुर को तहरीर देकर कार्रवाई की मांग की है।
थानाध्यक्ष अतुल कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है।

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