
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में अंडों पर एक्सपायरी डेट लिखने के नियम को फिलहाल लागू नहीं किया जाएगा। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि विभाग (FSDA) ने इस संबंध में हाथ खड़े कर दिए हैं। विभाग का कहना है कि यदि इस नियम को सख्ती से लागू किया गया, तो राज्य में अंडों की भारी कमी हो सकती है और कीमतों में भी बड़ा उछाल आ सकता है।
दरअसल, यूपी देश का सबसे बड़ा अंडा उपभोक्ता राज्य है। यहां रोजाना करीब 3.35 करोड़ अंडों की खपत होती है। हालांकि, राज्य में उत्पादन केवल लगभग 1.80 करोड़ अंडों का ही होता है। ऐसे में शेष 1.55 करोड़ अंडों की सप्लाई अन्य राज्यों—हरियाणा, पंजाब, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु—से होती है। यह कुल खपत का करीब 46% हिस्सा है।
समस्या की जड़ यह है कि इन राज्यों में अंडों पर स्टैंपिंग (जैसे प्रोडक्शन या एक्सपायरी डेट) केवल उन अंडों पर की जाती है, जिन्हें विदेशों में निर्यात किया जाना होता है। घरेलू बाजार में बिकने वाले अंडों पर आमतौर पर ऐसी कोई मार्किंग नहीं होती।
ऐसे में अगर यूपी में अंडों पर प्रोडक्शन और एक्सपायरी डेट लिखना अनिवार्य कर दिया जाता है, तो दूसरे राज्यों से आने वाले अंडे बाजार में बेचना मुश्किल हो जाएगा। इसका सीधा असर सप्लाई पर पड़ेगा और बाजार में अंडों की कमी हो सकती है।
वहीं, यूपी कुक्कुट विकास समिति के अध्यक्ष वीपी सिंह ने विभाग पर सवाल उठाते हुए कहा कि FSDA बड़े व्यापारियों के दबाव में काम कर रहा है। उनका आरोप है कि नियम लागू न करने के पीछे कुछ खास व्यापारिक हित जुड़े हो सकते हैं।








