
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में एक्स-रे टेक्नीशियन के 382 पदों पर चल रही भर्ती प्रक्रिया को लेकर बड़ा कानूनी विवाद खड़ा हो गया है। स्वास्थ्य विभाग की इस भर्ती प्रक्रिया पर अब Allahabad High Court की लखनऊ खंडपीठ ने गंभीर सवाल उठाए हैं, जिससे पूरी भर्ती प्रक्रिया पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।
हाईकोर्ट ने नियम बनाने की प्रक्रिया पर जताई नाराजगी
न्यायमूर्ति करुणेश सिंह पवार की एकल पीठ ने सुनवाई के दौरान यूपी एक्स-रे टेक्नीशियन सर्विस रूल्स-2024 को लेकर कड़ी नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा कि नियम बनाने की प्रक्रिया में पारदर्शिता और स्पष्टता नहीं दिख रही है।
सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि चिकित्सा स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. सुनील कुमार वर्मा को नियम बनाने की पूरी प्रक्रिया की जानकारी नहीं थी। अदालत ने टिप्पणी की कि न तो स्थायी अधिवक्ता और न ही संबंधित अधिकारी यह स्पष्ट कर पाए कि नियम कैसे बनाए गए।
स्पेशल सेक्रेटरी को तलब, रिकॉर्ड पेश करने का आदेश
कोर्ट ने मामले में कार्मिक विभाग के स्पेशल सेक्रेटरी स्तर के अधिकारी को 13 मई को संपूर्ण रिकॉर्ड के साथ पेश होने का आदेश दिया है। साथ ही कोर्ट ने मामले को शीर्ष दस वादों में सूचीबद्ध करने के निर्देश भी दिए हैं।
याचिका में नियमों को दी गई चुनौती
यह मामला दिवाकर सिंह द्वारा दायर याचिका से जुड़ा है, जिसमें यूपी एक्स-रे टेक्नीशियन सर्विस रूल्स-2024 को चुनौती दी गई है। सरकार की ओर से बताया गया कि पहले के न्यायिक आदेशों के अनुपालन में 2020 में निर्णय लिया गया था, लेकिन कोर्ट अब पूरी प्रक्रिया की जांच कर रही है।









