कानपुर। कानपुर से करीब 25 किलोमीटर दूर बिठूर में गंगा किनारे स्थित ब्रह्मा खूंटी धार्मिक और पौराणिक मान्यताओं के कारण खास महत्व रखती है। हिंदू मान्यता के अनुसार, इसी स्थान से सृष्टि की शुरुआत हुई थी। ब्रह्मा खूंटी नाम की यह खूंटी बिठूर के ब्रह्मावर्त घाट के किनारे स्थित है।
स्थानीय मान्यता है कि सावन के महीने में गंगा का जल ब्रह्मा जी की इस खूंटी को स्नान कराने जरूर पहुंचता है। कहा जाता है कि जिस वर्ष गंगा का पानी ब्रह्मा खूंटी को पूरी तरह डुबो देता है, उस साल अच्छी बारिश के संकेत माने जाते हैं। हालांकि, इसके साथ ही गंगा किनारे बसे गांवों में बाढ़ का खतरा बढ़ने की आशंका भी जताई जाती है।
स्थानीय लोगों का मानना है कि जिस दिन ब्रह्मा खूंटी मंदिर पूरी तरह गंगा के पानी में डूब जाएगा, उस दिन बिठूर के साथ कानपुर के कई इलाकों तक भी गंगा का बाढ़ का पानी पहुंच सकता है।
99 यज्ञ के बाद सृष्टि रचना की मान्यता
हिंदू मान्यता के अनुसार, ब्रह्मा जी ने बिठूर में इसी स्थान पर बैठकर 99 यज्ञ किए थे। मान्यता है कि इन्हीं यज्ञों के बाद मनु की उत्पत्ति हुई। धार्मिक कथाओं के अनुसार, मनु का आधा शरीर पुरुष और आधा स्त्री का था।
इसके बाद ब्रह्मा जी ने स्त्री स्वरूप को अलग किया और उसका नाम सतरूपा रखा। मान्यता है कि ब्रह्मा जी ने मनु और सतरूपा को सृष्टि की रचना का आदेश दिया। इसी वजह से बिठूर को धार्मिक और पौराणिक दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है।
ब्रह्मा खूंटी नाम पड़ने की क्या है मान्यता?
स्थानीय लोगों के अनुसार, यज्ञ पूरा होने के बाद जब ब्रह्मा जी बिठूर से जाने लगे तो मनु और सतरूपा ने उनसे अपनी कोई निशानी यहां छोड़ने का आग्रह किया।









