नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कावेरी जल विवाद से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई एक सप्ताह के लिए टाल दी। तमिलनाडु सरकार की ओर से दायर याचिका में कर्नाटक को राज्य के हिस्से का कावेरी जल तत्काल छोड़ने का निर्देश देने की मांग की गई है। अब मामले की अगली सुनवाई 24 अगस्त को होगी।
तमिलनाडु ने की पानी छोड़ने की मांग
तमिलनाडु सरकार का कहना है कि राज्य को कावेरी नदी के पानी का तय हिस्सा नहीं मिल रहा है। सरकार ने अपनी याचिका में दावा किया कि कावेरी जल विनियमन समिति (CWRC) की ओर से निर्धारित मात्रा और कर्नाटक की ओर से छोड़ा जा रहा पानी, दोनों ही अपेक्षा से काफी कम हैं।
17 अगस्त की जगह अब 24 अगस्त को सुनवाई
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने 3 अगस्त को इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। इसके बाद कोर्ट ने 12 अगस्त को कहा था कि तमिलनाडु सरकार और अन्य पक्षों की ओर से दाखिल याचिकाओं पर 17 अगस्त को सुनवाई होगी।
अब कोर्ट ने सुनवाई को एक सप्ताह के लिए आगे बढ़ा दिया है और अगली तारीख 24 अगस्त तय की है।
कर्नाटक को 3,500 क्यूसेक पानी छोड़ने का निर्देश
तमिलनाडु सरकार के मुताबिक, 28 जुलाई को हुई CWRC की बैठक में कर्नाटक को 29 जुलाई से अगले 15 दिनों तक रोजाना 3,500 क्यूसेक पानी छोड़ने का निर्देश दिया गया था।
हालांकि, तमिलनाडु का दावा है कि 29 जुलाई से 2 अगस्त के बीच बिलिगुंडुलु में कावेरी का पानी का प्रवाह केवल 158 से 550 क्यूसेक के बीच रहा। राज्य सरकार ने इसे तय मात्रा से काफी कम बताया है।
कर्नाटक के बांधों में 77.537 TMC पानी होने का दावा
तमिलनाडु सरकार की ओर से जारी प्रेस रिलीज में कहा गया कि 3 अगस्त तक कर्नाटक के काबिनी, हरंगी और हेमावती बांधों में कुल 77.537 TMC पानी जमा था।
तमिलनाडु सरकार का तर्क है कि उपलब्ध जल भंडारण को देखते हुए कर्नाटक के लिए राज्य का निर्धारित हिस्सा अनुपात के अनुसार जारी करना संभव होना चाहिए।









