- सेकेंड क्लास पैसेंजर’ शब्द पर जताई आपत्ति
- हादसे में मृत यात्री के परिवार को मिलेगा मुआवजा
- टिकट न मिलने पर भी नहीं छीना जा सकता अधिकार
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने रेलवे यात्रियों के अधिकारों को लेकर अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि किसी व्यक्ति की श्रेणी उसके खर्च या टिकट के आधार पर तय नहीं की जानी चाहिए। अदालत ने रेलवे के नियमों में प्रयुक्त ‘सेकेंड क्लास पैसेंजर’ शब्द पर आपत्ति जताते हुए कहा कि ‘सेकेंड क्लास’ का संबंध केवल कोच से होना चाहिए, यात्री से नहीं।
जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट और रेलवे क्लेम्स ट्रिब्यूनल के फैसले को रद्द करते हुए ट्रेन दुर्घटना में जान गंवाने वाले एक व्यक्ति के परिवार को 8 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि दुर्घटना के बाद मृतक के पास टिकट नहीं मिलने मात्र से उसके परिजनों को मुआवजे के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता। अदालत ने केंद्र सरकार को चार सप्ताह के भीतर मुआवजा राशि जारी करने का निर्देश दिया है।
साथ ही कहा कि यदि तय समय सीमा में भुगतान नहीं किया गया तो दावा दायर किए जाने की तारीख से 8 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ मुआवजा देना होगा।









