अंबेडकरनगर। जलालपुर ब्लॉक में ग्रामीण महिला सशक्तिकरण कार्यक्रम के तहत छह ग्राम पंचायतों से चयनित 30 नारी संघ लीडरों को महिला संरक्षण कानूनों की जानकारी दी गई। जन शिक्षण केंद्र की ओर से आयोजित एक दिवसीय प्रशिक्षण में घरेलू हिंसा, दहेज और बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कानूनों के प्रावधान समझाए गए।
घरेलू हिंसा के चार प्रमुख स्वरूपों पर चर्चा
प्रशिक्षण में घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, 2005 के बारे में जानकारी दी गई। प्रशिक्षक पुष्पा पाल ने बताया कि कानून महिलाओं को घरेलू हिंसा से सुरक्षा और सम्मानपूर्वक जीवन का अधिकार देता है।
प्रतिभागियों को शारीरिक, मौखिक एवं भावनात्मक, आर्थिक और लैंगिक हिंसा के बारे में विस्तार से बताया गया। महिलाओं में चोट, मानसिक तनाव, डर, व्यवहार में बदलाव और आर्थिक नियंत्रण जैसे संकेतों की पहचान पर भी चर्चा हुई।
‘रानी’ की कहानी से समझी घरेलू हिंसा
प्रशिक्षण को व्यवहारिक बनाने के लिए ‘रानी’ की कहानी के माध्यम से घरेलू हिंसा की स्थिति समझाई गई। प्रतिभागियों को समूहों में सवाल दिए गए। चर्चा के बाद समूहों ने अपने निष्कर्ष प्रस्तुत किए।
दहेज लेने-देने पर कानूनी प्रावधान बताए
दहेज प्रतिषेध अधिनियम, 1961 के बारे में भी जानकारी दी गई। प्रशिक्षण में बताया गया कि दहेज लेना और देना दोनों कानूनन निषिद्ध हैं। दहेज प्रथा से महिलाओं पर पड़ने वाले सामाजिक और आर्थिक प्रभावों पर चर्चा की गई।









