कर्नाटक। कर्नाटक हाईकोर्ट ने 16 साल की एक लड़की का नाम बदलने की अनुमति दे दी है। लड़की के माता-पिता ने उसका नाम ‘लक्ष्मी’ से बदलकर ‘वीणा’ करने की मांग की थी। परिवार का कहना था कि ज्योतिष और अंकशास्त्र के अनुसार ‘वीणा’ नाम बच्ची के लिए अधिक शुभ रहेगा। निचली अदालत से राहत नहीं मिलने के बाद पिता ने हाईकोर्ट में अपील की थी।
जस्टिस हंचाटे संजीवकुमार ने निचली अदालत के फैसले को रद्द करते हुए नाम बदलने की अनुमति दी। कोर्ट ने कहा कि समाज में प्रत्येक व्यक्ति की पहचान उसके नाम से होती है और नाम से पहचाने जाने का अधिकार नागरिक अधिकारों का हिस्सा है।
नाम बदलने को नागरिक अधिकार से जोड़ा
हाईकोर्ट ने कहा कि किसी व्यक्ति के नाम में सुधार या बदलाव की आवश्यकता होने पर इसके लिए सिविल कोर्ट में मुकदमा दायर किया जा सकता है। कोर्ट ने नाम को व्यक्ति की सामाजिक पहचान से जोड़ते हुए परिवार की याचिका पर विचार किया।
मामले में माता-पिता ने अदालत को बताया कि वे अपनी बेटी का नाम ‘लक्ष्मी एन.’ से बदलकर ‘वीणा एन.’ करना चाहते हैं। परिवार की ओर से नाम बदलने से संबंधित प्रक्रिया पूरी किए जाने की भी जानकारी दी गई।
2010 में हुआ था लड़की का जन्म
कोर्ट के मुताबिक, लड़की का जन्म 10 अक्टूबर 2010 को हुआ था। उसके नामकरण समारोह के दौरान उसका नाम ‘लक्ष्मी एन.’ रखा गया था। बाद में माता-पिता ने नाम बदलने का फैसला किया और स्कूल रिकॉर्ड समेत आधिकारिक दस्तावेजों में नया नाम दर्ज कराने की मांग की।
लड़की के पिता ने इस संबंध में सिविल कोर्ट में मुकदमा दायर किया था। उन्होंने अदालत से बेटी को ‘वीणा एन.’ के नाम से घोषित करने और स्कूल रिकॉर्ड में भी नया नाम दर्ज करने की अनुमति मांगी थी।
सिविल कोर्ट ने क्यों खारिज की थी याचिका
सिविल कोर्ट ने परिवार की याचिका खारिज करते हुए कहा था कि ‘वीणा एन.’ नाम से बच्ची की पहचान होने का कोई दस्तावेजी प्रमाण पेश नहीं किया गया है। अदालत ने यह भी कहा था कि माता-पिता ने पहले बच्ची के स्कूल से नाम बदलने के लिए संपर्क नहीं किया था।
इसके बाद बच्ची के पिता ने निचली अदालत के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट का रुख किया। हाईकोर्ट में परिवार ने नाम बदलने की प्रक्रिया से जुड़े अपने पक्ष और दस्तावेज अदालत के सामने रखे।









