अभिनेत्री और भाजपा सांसद कंगना रनोट ने भारत में स्टारलिंक को लाइसेंस मिलने में देरी को लेकर चल रही बहस में अभिनेता और राज्यसभा सांसद कमल हासन का समर्थन किया है। कंगना ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर हासन की टिप्पणी की तारीफ करते हुए इलॉन मस्क को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि किसी भी अरबपति को भारत या अमेरिका जैसे देश की नीतियां तय नहीं करनी चाहिए।
कंगना ने कमल हासन की टिप्पणी को बताया सटीक
कंगना रनोट ने कमल हासन की पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा, “ओह!! यह तो चुभ गया होगा।” इसके बाद उन्होंने मस्क को संबोधित करते हुए कहा कि किसी भी अरबपति को किसी देश की नीतियां तय नहीं करनी चाहिए, चाहे वह भारत हो या अमेरिका। कंगना ने हासन की बात को अच्छा, सटीक और व्यंग्यात्मक बताया।
स्टारलिंक के लाइसेंस पर मस्क ने उठाए सवाल
दरअसल, इलॉन मस्क ने भारत में अपनी सैटेलाइट इंटरनेट सेवा स्टारलिंक को लाइसेंस मिलने में हो रही देरी पर सवाल उठाए थे। मस्क ने ‘एक्स’ पर दावा किया कि स्टारलिंक को दुनिया के 165 से अधिक देशों में सेवा देने की मंजूरी मिल चुकी है और कंपनी पिछले पांच वर्षों से भारत सरकार के कानूनों तथा आवश्यक शर्तों का पालन कर रही है।
उन्होंने सवाल किया कि इसके बावजूद भारत में स्टारलिंक को लाइसेंस क्यों नहीं मिला है। इसी क्रम में उन्होंने उद्योगपति मुकेश अंबानी का जिक्र करते हुए पूछा कि क्या अंबानी देश के असली ताकतवर व्यक्ति हैं।
कमल हासन ने लोकतंत्र और जनता के अधिकारों की बात कही
मस्क के सवाल के जवाब में कमल हासन ने कहा कि कोई भी अरबपति किसी देश की नीति तय नहीं कर सकता। उन्होंने भारत को एक स्वतंत्र लोकतांत्रिक देश बताते हुए कहा कि यहां के लोग अपनी ताकतों और कमियों पर चर्चा करते हैं, सवाल उठाते हैं और सुधार के रास्ते खुद तय करते हैं।
हासन ने अपने बयान में कहा कि भारत दुनिया भर के निवेशकों और तकनीक का स्वागत करता है, लेकिन देश का भविष्य केवल भारतीय जनता तय करेगी। उनके मुताबिक, किसी विदेशी कारोबारी या अरबपति को भारत की नीतियों और भविष्य का निर्धारण करने का अधिकार नहीं है।
स्टारलिंक लाइसेंस को लेकर बहस तेज
स्टारलिंक को भारत में सेवा शुरू करने के लिए नियामकीय मंजूरियों की जरूरत है। लाइसेंस में देरी को लेकर मस्क की टिप्पणी के बाद तकनीकी निवेश, सरकारी नियमों और देश की नीतियां तय करने के अधिकार पर बहस तेज हो गई है। कंगना के समर्थन के बाद यह मुद्दा सोशल मीडिया पर राजनीतिक चर्चा का विषय भी बन गया है।









