- BOJ ने ब्याज दर 1% से बढ़ाकर 1.25% की
- करीब 31 साल में सबसे ऊंचा स्तर
- फैसला 7-2 से हुआ
जापान के केंद्रीय बैंक बैंक ऑफ जापान (BOJ) ने शुक्रवार 18 सितंबर को अपनी नीतिगत ब्याज दर 1% से बढ़ाकर 1.25% कर दी। यह करीब 31 साल में जापान की सबसे ऊंची ब्याज दर है। अप्रैल 1995 के बाद पहली बार दर इस स्तर पर पहुंची है। फैसला 7-2 के बहुमत से लिया गया।
महंगाई और कमजोर येन बनी बड़ी वजह
BOJ के इस फैसले का प्रमुख कारण बढ़ती कीमतों का दबाव और कमजोर येन है। कमजोर येन की वजह से जापान के लिए विदेशों से तेल, गैस और दूसरी जरूरी वस्तुएं खरीदना महंगा हो जाता है। वहीं ब्याज दर बढ़ने से कर्ज महंगा होता है और अर्थव्यवस्था में पैसे के प्रवाह पर असर पड़ सकता है।
अगस्त में जापान की कोर महंगाई दर 1.7% रही, जो जुलाई के 1.8% से थोड़ी कम है। यह BOJ के 2% लक्ष्य के आसपास बनी हुई है।
कभी ब्याज दर माइनस में थी
जापान लंबे समय तक बेहद कम और नकारात्मक ब्याज दरों की नीति पर चला। 2024 में BOJ ने करीब एक दशक बाद नकारात्मक ब्याज दर की व्यवस्था खत्म की थी। इसके बाद से केंद्रीय बैंक धीरे-धीरे दरें बढ़ा रहा है। मौजूदा बढ़ोतरी के साथ पिछले ढाई साल में दरों में छठी बढ़ोतरी हुई है।
कमजोर येन से बढ़ी आयात की लागत
जापान की मुद्रा येन लंबे समय से दबाव में है। कमजोर येन का सीधा असर आयातित सामान और ऊर्जा की कीमतों पर पड़ता है। हालिया रिपोर्टों के मुताबिक दर बढ़ाने के बावजूद शुक्रवार को येन डॉलर के मुकाबले कमजोर हुआ और करीब 157.8 येन प्रति डॉलर तक पहुंच गया।
मिडिल ईस्ट तनाव से तेल महंगा होने का खतरा
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव भी जापान के लिए चिंता का कारण है। जापान अपनी ऊर्जा जरूरतों के एक बड़े हिस्से के लिए आयात पर निर्भर है। ऐसे में कच्चे तेल की कीमत बढ़ने पर जापान में आयात की लागत और महंगाई दोनों बढ़ सकती हैं। BOJ ने भी बढ़ती कीमतों के जोखिम को दर बढ़ाने के फैसले में ध्यान में रखा है।
अमेरिका और यूरोप की नीतियों का भी असर
दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में महंगाई और ब्याज दरों को लेकर नीतिगत बदलाव जारी हैं। BOJ का यह कदम ऐसे समय आया है जब अमेरिका और यूरोप में भी महंगाई और ऊर्जा कीमतों को लेकर केंद्रीय बैंक अपनी मौद्रिक नीतियों को सख्त रखने पर विचार कर रहे हैं।
जापान के लोगों और कारोबार पर क्या असर?
ब्याज दर बढ़ने से जापान में कर्ज लेना महंगा हो सकता है। इसका असर घर खरीदने वाले लोगों, कारोबारियों और कंपनियों की उधारी पर पड़ सकता है। दूसरी ओर ऊंची ब्याज दरों का उद्देश्य अर्थव्यवस्था में महंगाई के दबाव को नियंत्रित करना और कीमतों में अत्यधिक बढ़ोतरी के जोखिम को कम करना है।
हालांकि, दर बढ़ने के बावजूद येन में तत्काल मजबूती नहीं आई। इससे आगे BOJ की ब्याज दर नीति और जापानी मुद्रा की दिशा पर बाजार की नजर बनी रहेगी।









