नई दिल्ली। कमजोर मानसून और अल नीनो की आशंका के बीच खाद्य पदार्थों की कीमतों में बढ़ोतरी ने चिंता बढ़ा दी है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले 20 दिनों में चीनी के दाम 10.16 प्रतिशत, दूध के 6.12 प्रतिशत, दालों के 4.68 प्रतिशत और आटे के 6.67 प्रतिशत तक बढ़े हैं। खाद्य उद्योग को आशंका है कि मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों का असर वर्ष 2027 में फसलों के उत्पादन और बाजार में खाद्य पदार्थों की उपलब्धता पर पड़ सकता है।
इंडियन पल्सेज एंड ग्रेन्स एसोसिएशन के अध्यक्ष बिमल कोठारी के मुताबिक, वर्ष 2027 में कृषि उत्पादन को लेकर चिंता है। महाराष्ट्र और कर्नाटक में सूखे जैसी परिस्थितियां रबी सीजन की चने की फसल के लिए चुनौती बन सकती हैं। वहीं, गन्ने की पैदावार पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
चीनी के दाम में और बढ़ोतरी की आशंका
खाद्य उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों ने चीनी की उपलब्धता और कीमतों को लेकर भी चिंता जताई है। इंडियन फेडरेशन ऑफ ग्रेन एनर्जी के दिलीप पाटिल के मुताबिक, वित्त वर्ष 2027-28 के अंत तक चीनी का उत्पादन और उपलब्धता चुनौतीपूर्ण रह सकते हैं।
दी गई जानकारी के अनुसार, चीनी का मिल भाव फिलहाल करीब 42 रुपये प्रति किलो है, जबकि खुदरा बाजार में इसकी कीमत 55 रुपये प्रति किलो तक बताई गई है। अनुमान है कि जून से अक्टूबर 2027 के बीच मिल भाव में 30 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो सकती है। यह उद्योग से जुड़ा अनुमान है, निश्चित मूल्य वृद्धि नहीं।
सोयाबीन, मूंगफली और गन्ने की फसल पर चिंता
श्री रेणुका शुगर्स के निदेशक अतुल चतुर्वेदी ने सोयाबीन और मूंगफली की पैदावार पर गंभीर असर पड़ने की आशंका जताई है। उनके मुताबिक, कर्नाटक और महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में पानी की कमी गन्ने की फसल को भी प्रभावित कर सकती है।
यदि मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियां लंबे समय तक बनी रहती हैं, तो तिलहन और चीनी के घरेलू उत्पादन पर दबाव बढ़ सकता है। इससे बाजार में आपूर्ति और कीमतों पर असर पड़ने की आशंका है।
क्या है अल नीनो?
अल नीनो प्रशांत महासागर के भूमध्यरेखीय क्षेत्र में समुद्र की सतह के तापमान में असामान्य बढ़ोतरी से जुड़ी जलवायु घटना है। इसके कारण वैश्विक वायुमंडलीय परिसंचरण और वर्षा के पैटर्न में बदलाव हो सकता है। भारत में इसके प्रभाव से मानसून कमजोर पड़ने या बारिश के वितरण में असमानता का जोखिम बढ़ सकता है, हालांकि हर अल नीनो का असर एक जैसा नहीं होता।
भारत के पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अनुसार, ‘सुपर अल नीनो’ कोई अलग आधिकारिक श्रेणी नहीं है। अल नीनो की तीव्रता और भारत पर उसका वास्तविक प्रभाव समुद्र तथा वायुमंडल की परिस्थितियों पर निर्भर करता है। ऐसे में वर्ष 2027 में फसलों और खाद्य कीमतों पर पड़ने वाला असर मौसम के आगे के पूर्वानुमानों और उत्पादन की स्थिति से स्पष्ट होगा।









