सोना ₹1,884 और चांदी ₹2,900 सस्ती, दो दिन में दोनों धातुओं के दाम गिरे

IBJA के मुताबिक सोना ₹1.44 लाख और चांदी ₹2.06 लाख प्रति यूनिट पर पहुंची, आगे भी उतार-चढ़ाव की आशंका

नई दिल्ली। सोने और चांदी की कीमतों में 21 अक्टूबर को लगातार दूसरे कारोबारी दिन गिरावट दर्ज की गई। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक, 10 ग्राम 24 कैरेट सोने का भाव 1,884 रुपये गिरकर करीब 1.44 लाख रुपये पर आ गया। वहीं, एक किलो चांदी की कीमत 2,900 रुपये घटकर करीब 2.06 लाख रुपये रह गई।

दिए गए आंकड़ों के अनुसार, दो कारोबारी दिनों में सोना करीब 2,300 रुपये और चांदी लगभग 5,000 रुपये सस्ती हुई है। कीमतों में इस गिरावट से सोना-चांदी खरीदने की योजना बना रहे लोगों की नजर बाजार के अगले रुख पर है।

सितंबर में भी गिरे थे सोने-चांदी के दाम

सितंबर में भी दोनों कीमती धातुओं की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई थी। दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, 31 अगस्त को सोना 1.56 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम था, जो 30 सितंबर तक घटकर 1.48 लाख रुपये रह गया। इस दौरान सोने की कीमत करीब 8,000 रुपये कम हुई।

इसी तरह, एक किलो चांदी का भाव 2.37 लाख रुपये से गिरकर 2.22 लाख रुपये पर पहुंच गया था। यानी सितंबर में चांदी करीब 15,000 रुपये सस्ती हुई।

आगे भी कीमतों में उतार-चढ़ाव की आशंका

विशेषज्ञों के मुताबिक, सोने और चांदी की कीमतों में फिलहाल उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों से जुड़ी नीतियां, वैश्विक तनाव और आर्थिक अनिश्चितता जैसी परिस्थितियां कीमती धातुओं की कीमतों को प्रभावित कर सकती हैं।

एक ओर ब्याज दरों में बढ़ोतरी या ऊंची दरें सोने की मांग पर दबाव डाल सकती हैं, वहीं दूसरी ओर भू-राजनीतिक तनाव और आर्थिक अनिश्चितता के दौरान निवेशक सोने को सुरक्षित निवेश के विकल्प के रूप में देख सकते हैं।

निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह

बाजार में आगे की दिशा को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। ऐसे में निवेशकों को जल्दबाजी में फैसला लेने के बजाय कीमतों में बदलाव और वैश्विक आर्थिक संकेतों पर नजर रखनी चाहिए। बड़ी गिरावट के दौरान खरीदारी का अवसर बन सकता है, लेकिन यह इस बात पर निर्भर करेगा कि बाजार में गिरावट कितनी टिकाऊ रहती है।

सोना-चांदी खरीदने वाले ग्राहकों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि IBJA के भाव और आभूषण दुकानों पर मिलने वाली कीमतों में अंतर हो सकता है। खुदरा कीमत पर जीएसटी, मेकिंग चार्ज और अन्य लागतों का असर पड़ता है।

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