सरकारी क्रय केंद्रों पर भुगतान में देरी कैसे बन रही किसानों की मुश्किल?

  • समय पर भुगतान न मिलने से किसान हो रहे हैं आर्थिक रूप से परेशान
  • शासन की स्पष्ट गाइडलाइन के बावजूद एजेंसियां समय पर भुगतान में विफल
  • केंद्र प्रभारियों के चक्कर काट रहे किसान, सुनवाई के नाम पर मिल रहा आश्वासन

अम्बेडकरनगर ।  यह समस्या गंभीर है और किसानों के हितों को सीधे प्रभावित करती है। नियमानुसार 48 घंटे के भीतर भुगतान किया जाना चाहिए, लेकिन देरी से किसानों को आर्थिक परेशानी हो रही है और उनका विश्वास सरकारी प्रक्रियाओं से कमजोर हो रहा है। इसके प्रमुख बिंदुओं का विश्लेषण इस प्रकार है:

भुगतान में देरी के प्रमुख कारण:

  • तकनीकी गड़बड़ियाँ- पोर्टल संबंधी समस्याओं के कारण कुछ भुगतान प्रक्रियाएं अटकी हुई हैं।

  • प्रशासनिक विलंब- संबंधित एजेंसियों (जैसे PCF, PCU, UPSSC, FCI) के बीच समन्वय की कमी।

  • लक्ष्य पूर्ति का दबाव- अभी तक केवल 18% गेहूं खरीद हुआ है, जो लक्ष्य (3.12 लाख क्विंटल) से काफी कम है।

किसानों पर प्रभाव:

  • आर्थिक तंगी के कारण कुछ किसान निजी व्यापारियों को गेहूं बेचने को मजबूर हैं, जिससे समर्थन मूल्य योजना का उद्देश्य प्रभावित हो रहा है।

  • बार-बार क्रय केंद्रों पर जाने से किसानों का समय और संसाधन बर्बाद हो रहा है।

संभावित समाधान:

  • तकनीकी सुधार- पोर्टल की कार्यक्षमता बढ़ाने और त्वरित भुगतान प्रणाली (जैसे DBT) सुनिश्चित करने की आवश्यकता।

  • जवाबदेही तय करना- यदि कोई एजेंसी 48 घंटे में भुगतान नहीं करती, तो उस पर जुर्माना या अन्य कार्रवाई होनी चाहिए।

  • किसानों को विकल्प- भुगतान की स्थिति की रियल-टाइम ट्रैकिंग के लिए SMS/ऐप आधारित सिस्टम लागू किया जाए।

  • निजी व्यापारियों की जगह सरकारी खरीद बढ़ाना- किसानों को समर्थन मूल्य का पूरा लाभ मिले, इसके लिए प्रोत्साहन दिया जाए।

अधिकारियों की प्रतिक्रिया:

  • उप जिला विपणन अधिकारी ने भुगतान प्रक्रिया में तेजी लाने का आश्वासन दिया है, लेकिन किसानों को ठोस परिणाम चाहिए।

  • शासन स्तर पर इस मामले की निगरानी की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी देरी न हो।

निष्कर्ष-

सरकार को किसानों के भुगतान को प्राथमिकता देते हुए एक पारदर्शी और कुशल प्रणाली विकसित करनी चाहिए। अन्यथा, किसानों का सरकारी योजनाओं से मोहभंग हो सकता है, जिससे समर्थन मूल्य प्रणाली का उद्देश्य ही विफल हो जाएगा।

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