क्या प्रशासन की योजना 2030 तक जिले को टीबी मुक्त बनाने की है?

  • जिले में टीबी के खिलाफ विशेष अभियान की शुरुआत
  • 60 नए गांवों को टीबी मुक्त बनाने का लक्ष्य
  • क्या हैं टीबी के लक्षण? जानें इससे बचने के उपाय

अम्बेडकरनगर। जिले को क्षयरोग (टीबी) मुक्त बनाने के लिए प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। आगामी 10 मई से 60 गांवों में विशेष जांच अभियान चलाया जाएगा, जिसमें हर नागरिक की टीबी जांच अनिवार्य रूप से की जाएगी।

59 गांव पहले ही हो चुके हैं टीबी मुक्त

पिछले दो वर्षों में जिले के 59 गांवों को टीबी मुक्त घोषित किया जा चुका है। इस बार 60 नए गांवों को चिन्हित कर उन्हें टीबी मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा गया है। जिला क्षयरोग अधिकारी डॉ. रामानंद सिद्धार्थ ने बताया कि इस अभियान के तहत गांव-गांव जागरूकता फैलाई जाएगी और नए मरीजों की पहचान कर उनका इलाज शुरू किया जाएगा।

128 नए मरीज मिले, 4,431 का चल रहा इलाज

अप्रैल में चले घर-घर दस्तक अभियान के दौरान 1,134 घरों का सर्वे किया गया, जिसमें 128 नए टीबी रोगी पाए गए। वर्तमान में जिले में 4,431 मरीज दवाओं का सेवन कर रहे हैं, जिनमें से 3,760 को निक्षय मित्र योजना के तहत गोद लिया गया है। डॉ. सिद्धार्थ ने बताया कि इस साल टीबी के मामलों में कमी आई है और उपचार सफलता दर 92% तक पहुंच गई है।

101 गांवों में एक भी मामला नहीं

जिले के कुल 899 गांवों में से 59 को टीबी मुक्त घोषित किया जा चुका है, जबकि 101 गांव ऐसे हैं जहां 2024 में एक भी नया मामला सामने नहीं आया। इन गांवों में अब विशेष जागरूकता अभियान चलाकर उन्हें भी टीबी मुक्त बनाने की तैयारी की जा रही है।

ये हैं टीबी के प्रमुख लक्षण

  • तीन सप्ताह से अधिक खांसी

  • खांसी के साथ खून आना

  • भूख कम लगना और वजन घटना

  • रात को पसीना आना और बुखार

सीएमओ डॉ. संजय कुमार शैवाल ने बताया कि 2030 तक जिले को टीबी मुक्त बनाने का लक्ष्य है। इसके लिए आशा, एएनएम और स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी लगातार प्रयास कर रहे हैं। अभियान के तहत लोगों को टीबी के लक्षण, बचाव और इलाज के बारे में जागरूक किया जाएगा।

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