
सरोजनी नगर (लखनऊ)। सरोजनी नगर तहसील में आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस उस समय हंगामे में बदल गया, जब तहसील बार के अधिवक्ताओं ने प्रशासन पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाते हुए जोरदार विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। अधिवक्ताओं ने तहसील सभागार में जमीन पर बैठकर नारेबाजी की और “तहसील प्रशासन मुर्दाबाद” तथा “भ्रष्ट प्रशासन मुर्दाबाद” के नारे लगाए, जिससे कुछ समय के लिए माहौल तनावपूर्ण हो गया।
अधिकारियों की मौजूदगी, कई अफसर रहे गैरहाजिर
संपूर्ण समाधान दिवस की शुरुआत मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) की अध्यक्षता में हुई। कार्यक्रम में एडीएम सप्लाई, उप जिलाधिकारी सरोजनी नगर, तहसीलदार समेत विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। हालांकि, सरोजनी नगर सहित अन्य तहसीलों के कई अधिकारी बिना सूचना के गैरहाजिर रहे। प्रशासन ने इसे गंभीरता से लेते हुए अनुपस्थित अधिकारियों का एक दिन का वेतन काटने के निर्देश दिए हैं।
अधिवक्ताओं ने लगाए भ्रष्टाचार और मनमानी के आरोप
कार्यक्रम के दौरान अचानक तहसील बार के अधिवक्ता विरोध में उतर आए। उन्होंने आरोप लगाया कि तहसील प्रशासन आम जनता के कार्यों में जानबूझकर देरी करता है और भ्रष्टाचार के चलते फरियादियों को बार-बार तहसील के चक्कर लगाने पड़ते हैं। अधिवक्ताओं का कहना था कि शिकायतें दर्ज तो की जाती हैं, लेकिन उनका समयबद्ध निस्तारण नहीं होता।
प्रदर्शन कर रहे अधिवक्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि तहसील की कार्यप्रणाली में सुधार नहीं हुआ और भ्रष्टाचार पर लगाम नहीं लगी, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
कड़ाके की ठंड में भटकते रहे फरियादी
संपूर्ण समाधान दिवस में दूर-दराज के गांवों से आए दर्जनों फरियादी अपनी समस्याएं लेकर पहुंचे थे। कड़ाके की ठंड में घंटों इंतजार करने के बाद भी जब उनकी शिकायतों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो कई लोग निराश होकर वापस लौट गए। फरियादियों ने आरोप लगाया कि समाधान दिवस अब सिर्फ औपचारिकता बनकर रह गया है और उनकी समस्याओं का वास्तविक समाधान नहीं हो पा रहा है।
शहीद की मां ने उठाई सम्मान राशि लौटाने की मांग
संपूर्ण समाधान दिवस के दौरान एक भावुक मामला भी सामने आया। कृष्ण लोक कॉलोनी निवासी शहीद सहायक कमांडेंट विवेक सक्सेना की मां सावित्री सक्सेना तहसील पहुंचीं और उन्होंने अशोक चक्र श्रृंखला के तहत मिली सम्मान राशि को सम्मानपूर्वक मुख्यमंत्री को वापस करने के लिए उनसे मुलाकात कराने की मांग की।
सावित्री सक्सेना ने बताया कि वर्ष 2016 से वह शहीद पुत्र के नाम पर मिलने वाले सरकारी लाभ, विशेष रूप से कृषि भूमि आवंटन के लिए अधिकारियों के चक्कर काट रही हैं। उन्होंने बताया कि शहीद स्मारक ग्राम मिशनपुर पिनवट में बन चुका है, जिसका उद्घाटन तत्कालीन राज्यपाल राम नाईक ने 8 जनवरी 2017 को किया था, लेकिन शासनादेश और उच्च अधिकारियों के निर्देशों के बावजूद अब तक कृषि भूमि का आवंटन नहीं हो सका।
लंबे संघर्ष से आहत शहीद की मां
शहीद की मां ने आरोप लगाया कि बीते करीब 20 वर्षों से जनपद स्तर पर अधिकारी केवल आश्वासन देते आ रहे हैं। लगातार मानसिक, शारीरिक और आर्थिक उत्पीड़न से आहत होकर उन्होंने सरकार द्वारा दी गई अशोक चक्र श्रृंखला की धनराशि को सम्मानपूर्वक मुख्यमंत्री को वापस करने का फैसला लिया है।








