धार्मिक टिप्पणियों पर रोक- कोर्ट का दो टूक संदेश बाबा रामदेव को

  • शरबत जिहाद’ टिप्पणी पर कोर्ट सख्त, बाबा रामदेव को चेतावनी
  • हमदर्द की याचिका पर सुनवाई, पतंजलि को देना होगा जवाब
  • धार्मिक भावनाएं भड़काने वाले वीडियो हटाने का वादा

नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने पतंजलि के फाउंडर बाबा रामदेव के उस बयान पर कड़ी नाराजगी जताई है, जिसमें उन्होंने ‘शरबत जिहाद’ शब्द का इस्तेमाल किया था। कोर्ट ने इसे बेहद आपत्तिजनक करार देते हुए कहा कि यह बयान माफ़ी के काबिल नहीं है और इससे न्यायालय की अंतरात्मा तक झकझोर गई है। यह टिप्पणी बाबा रामदेव द्वारा पतंजलि के शरबत के प्रमोशन के दौरान दी गई थी, जहां उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से हमदर्द कंपनी के रूह अफजा शरबत को मुस्लिम संस्थाओं से जोड़ते हुए विवादास्पद बातें कही थीं। इसके खिलाफ हमदर्द ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

बयान पर कोर्ट की सख्ती, रामदेव से मांगा एफिडेविट
कोर्ट ने रामदेव से इस मामले में एक शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है, जिसमें वे यह स्पष्ट करें कि भविष्य में इस तरह की बयानबाजी नहीं दोहराई जाएगी। साथ ही, कोर्ट ने कहा कि धार्मिक टिप्पणियां सार्वजनिक मंचों पर नहीं, बल्कि अपने विचारों तक सीमित रखी जाएं। पतंजलि की ओर से एडवोकेट राजीव नायर ने अदालत को आश्वस्त किया कि ऐसे सभी वीडियो हटाए जाएंगे, जिनमें धार्मिक टिप्पणियां की गई हैं।

क्या था पूरा मामला?
बाबा रामदेव ने 3 अप्रैल को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक वीडियो जारी कर पतंजलि के शरबत का प्रचार किया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि कुछ कंपनियां शरबत बेचकर उससे मिलने वाली कमाई से मस्जिदें और मदरसे बनवाती हैं। रामदेव ने कहा था।

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