
भारतीय म्यूजिक इंडस्ट्री में तेजी से बदलाव देखने को मिल रहे हैं। अब बड़ी म्यूजिक कंपनियां क्षेत्रीय संगीत बाजार पर फोकस बढ़ा रही हैं। Times Music, Warner Music India और Saregama जैसी कंपनियां लोकल गानों और क्षेत्रीय कैटलॉग खरीदने में भारी निवेश कर रही हैं। इसका सीधा फायदा क्षेत्रीय कलाकारों, छोटे म्यूजिक लेबल्स और संगीत प्रेमियों को मिलने की उम्मीद है।
हिंदी फिल्म म्यूजिक की बढ़ती लागत बनी वजह
विशेषज्ञों के मुताबिक हिंदी फिल्म संगीत की बढ़ती लागत और स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म से घटती कमाई ने कंपनियों को नए विकल्प तलाशने पर मजबूर किया है। ऐसे में क्षेत्रीय संगीत बाजार कंपनियों के लिए मजबूत और कम जोखिम वाला विकल्प बनकर उभरा है।
कंपनियां अब नए कंटेंट पर भारी खर्च करने के बजाय पहले से लोकप्रिय और स्थापित क्षेत्रीय कैटलॉग खरीद रही हैं। इससे उन्हें स्थायी ऑडियंस और लगातार डिजिटल कमाई का फायदा मिल रहा है।
क्षेत्रीय कलाकारों को मिलेगा ग्लोबल प्लेटफॉर्म
इस कन्सॉलिडेशन का सबसे बड़ा फायदा क्षेत्रीय कलाकारों और छोटे म्यूजिक लेबल्स को होगा। बड़ी कंपनियों के साथ जुड़ने से उन्हें वैश्विक डिजिटल प्लेटफॉर्म, बेहतर तकनीक और मजबूत मार्केटिंग नेटवर्क तक पहुंच मिलेगी।
इसके अलावा गानों की ऑडियो क्वालिटी, डिजिटल वितरण और रॉयल्टी प्रबंधन में भी सुधार देखने को मिलेगा। अब तक जिन क्षेत्रीय गानों का डिजिटल रिकॉर्ड और सही भुगतान नहीं हो पाता था, वे भी मुख्यधारा के स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म का हिस्सा बन सकेंगे।
भारतीय म्यूजिक इंडस्ट्री की कमाई में बढ़ोतरी
फिक्की-ईवाई रिपोर्ट के अनुसार, साल 2025 में भारतीय म्यूजिक इंडस्ट्री का रेवेन्यू करीब 10 प्रतिशत बढ़कर 5,900 करोड़ रुपए तक पहुंच गया। यह संकेत है कि डिजिटल म्यूजिक और क्षेत्रीय कंटेंट की मांग लगातार बढ़ रही है।









