
- देशभक्ति फिल्मों से मिली ‘भारत कुमार’ की उपाधि।
- ‘उपकार’ फिल्म से निर्देशन की दुनिया में रखा कदम।
- लाल बहादुर शास्त्री से प्रेरित होकर बनाई ‘उपकार’।
नई दिल्ली। अभिनेता और निर्देशक मनोज कुमार का शुक्रवार सुबह मुंबई के कोकिलाबेन अस्पताल में निधन हो गया। वे 87 वर्ष के थे और लंबे समय से बीमार चल रहे थे। उनके परिवार ने पुष्टि की कि मनोज कुमार का अंतिम संस्कार शनिवार सुबह मुंबई के पवनहंस श्मशान घाट में किया जाएगा।
मनोज कुमार को हिंदी सिनेमा में देशभक्ति की भावना को सशक्त रूप से प्रस्तुत करने के लिए जाना जाता था। ‘उपकार’, ‘पूरब और पश्चिम’, ‘क्रांति’ और ‘रोटी, कपड़ा और मकान’ जैसी उनकी फिल्मों ने उन्हें ‘भारत कुमार’ की पहचान दिलाई।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित कई राजनीतिक और फिल्मी हस्तियों ने उनके निधन पर शोक व्यक्त किया। पीएम मोदी ने उन्हें याद करते हुए कहा कि उनके योगदान से आने वाली पीढ़ियां प्रेरित होती रहेंगी।
मनोज कुमार का जन्म 24 जुलाई 1937 को एबटाबाद (अब पाकिस्तान) में हुआ था। विभाजन के दौरान उनका परिवार भारत आ गया। फिल्मों में आने से पहले उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की। फिल्मों में उनकी शुरुआत छोटे किरदारों से हुई, लेकिन जल्द ही वे मुख्य भूमिका में नजर आने लगे। 1967 में आई फिल्म ‘उपकार’ ने उन्हें न सिर्फ एक बेहतरीन अभिनेता बल्कि एक सफल निर्देशक के रूप में भी स्थापित किया।
मनोज कुमार को उनके योगदान के लिए कई प्रतिष्ठित पुरस्कार मिले, जिनमें 1992 में पद्मश्री और 2016 में दादा साहेब फाल्के पुरस्कार शामिल हैं। उनके निधन से फिल्म जगत में शोक की लहर दौड़ गई है, लेकिन उनकी फिल्में और उनकी देशभक्ति की भावना सिनेमा प्रेमियों के दिलों में हमेशा जीवित रहेंगी।








