
- महामाया मेडिकल कॉलेज में विश्व स्तनपान सप्ताह पर संगोष्ठी का आयोजन
- स्तनपान की महत्ता और भ्रांतियों पर विशेषज्ञों ने दी जानकारी
- माताओं के लिए स्थायी सहयोग प्रणाली की आवश्यकता पर बल
अम्बेडकरनगर। महामाया राजकीय एलोपैथिक मेडिकल कॉलेज में विश्व स्तनपान सप्ताह के अवसर पर बुधवार को एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। बाल रोग, स्त्री एवं प्रसूति रोग तथा कम्युनिटी मेडिसिन विभाग के समन्वय से आयोजित इस संगोष्ठी में मातृ-शिशु स्वास्थ्य को लेकर विभिन्न पहलुओं पर विचार साझा किए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य स्तनपान की महत्ता, इसके लाभ और समाज में इसके प्रति जागरूकता को बढ़ाना रहा।
प्राचार्य डॉ. मुकेश यादव ने किया कार्यक्रम का शुभारंभ
संगोष्ठी की शुरुआत कॉलेज के प्राचार्य डॉ. मुकेश यादव ने की। उन्होंने अपने संबोधन में बताया कि स्तनपान एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, जो शिशु के पोषण और रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूती देने के लिए आवश्यक है। उन्होंने कहा कि इस विषय पर समाज के हर वर्ग में व्यापक जागरूकता फैलाने की आवश्यकता है।
थीम पर आधारित प्रस्तुतियां, माताओं की सहायता पर रहा केंद्र
इस वर्ष विश्व स्तनपान सप्ताह की थीम “स्तनपान को प्राथमिकता दें: स्थायी सहायता प्रणालियाँ बनाएँ” रही। इस संदर्भ में कॉलेज में आयोजित संगोष्ठी में वक्ताओं ने बताया कि स्तनपान को बढ़ावा देने के लिए घर, कार्यस्थल और सार्वजनिक स्थानों पर स्थायी सहायता प्रणालियों की आवश्यकता है। वक्ताओं ने यह भी बताया कि कामकाजी माताओं के लिए स्तनपान को सरल बनाने हेतु कार्यस्थल पर उपयुक्त समय और स्थान सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
विशेषज्ञों ने रखे तथ्य, भ्रांतियों को दूर करने की अपील
बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. अमित गुप्ता ने कहा कि जन्म के एक घंटे के भीतर शिशु को स्तनपान शुरू कराना अत्यंत आवश्यक है। इससे शिशु की रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहतर होती है और गंभीर बीमारियों जैसे डायरिया व न्यूमोनिया से उसकी रक्षा होती है।








