BRICS पर कांग्रेस में अलग राय

चिदंबरम ने पूछा- भारत को क्या फायदा?

  • पी. चिदंबरम ने BRICS समेत कई संगठनों की उपयोगिता पर उठाया सवाल
  • शशि थरूर ने सम्मेलन को भारत की कूटनीतिक ताकत का प्रदर्शन बताया
  • 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में होगा 18वां BRICS समिट

नई दिल्ली। भारत में होने वाले BRICS समिट को लेकर कांग्रेस के दो वरिष्ठ नेताओं के अलग-अलग बयान सामने आए हैं। पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने BRICS की सदस्यता से भारत को मिलने वाले ठोस लाभ पर सवाल उठाया है। वहीं कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने सम्मेलन की मेजबानी को भारत के लिए कूटनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बताया है।

चिदंबरम ने पूछा- क्या मिला फायदा?

पी. चिदंबरम ने BRICS के अलावा G20, QUAD और शंघाई सहयोग संगठन (SCO) जैसे बहुपक्षीय संगठनों में भारत की भागीदारी का जिक्र करते हुए सवाल उठाया कि इन संगठनों से देश को वास्तव में कितना ठोस फायदा मिला है।

उन्होंने कहा कि भारत को ऐसे संगठनों की सदस्यता और उनसे होने वाले लाभ पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। चिदंबरम ने यह भी सवाल उठाया कि भारत में पहले 2012, 2016 और 2021 में BRICS समिट आयोजित हो चुके हैं, ऐसे में यह देखना जरूरी है कि इन बैठकों से देश को क्या हासिल हुआ।

थरूर ने बताई भारत की कूटनीतिक ताकत

इसके विपरीत शशि थरूर ने BRICS समिट की मेजबानी को भारत की कूटनीतिक क्षमता का प्रमाण बताया। उन्होंने कहा कि भारत में इतने बड़े सम्मेलन का आयोजन अपने आप में देश की कूटनीतिक ताकत को दर्शाता है।

थरूर के मुताबिक 11 सदस्य देशों के शीर्ष नेताओं को भारत में एक मंच पर लाना यह दिखाता है कि नई दिल्ली अलग-अलग देशों को साथ लाने और उनके बीच संवाद कायम करने की क्षमता रखती है।

ग्लोबल साउथ के लिए अहम मंच बताया

शशि थरूर ने BRICS को ग्लोबल साउथ के लिए भी महत्वपूर्ण मंच बताया। उन्होंने कहा कि ग्लोबल साउथ में 100 से ज्यादा देश हैं, लेकिन BRICS में शामिल 11 प्रमुख देश दुनिया की बड़ी आबादी और करीब 41 प्रतिशत वैश्विक GDP का प्रतिनिधित्व करते हैं।

उनका कहना है कि इतने बड़े आर्थिक और जनसंख्या आधार वाले समूह को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। ऐसे में BRICS भारत के लिए वैश्विक स्तर पर अपनी भूमिका मजबूत करने का महत्वपूर्ण मंच है।

12-13 सितंबर को नई दिल्ली में समिट

18वें BRICS समिट का आयोजन 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में होगा। सम्मेलन में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग समेत 11 सदस्य देशों के शीर्ष नेताओं के शामिल होने की उम्मीद है।

समिट के दौरान वैश्विक अर्थव्यवस्था, व्यापार, तकनीक और ऊर्जा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होगी। सम्मेलन को भारत की कूटनीतिक सक्रियता और वैश्विक मंच पर उसकी भूमिका के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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