
- नियमों की अनदेखी से टैक्सी बन रहे प्राइवेट वाहन
- सफेद नंबर प्लेट पर दौड़ रहा काला धंधा
- सरकारी विभाग भी किराए पर ले रहे अवैध वाहन
अम्बेडकरनगर। जिले में मोटर वाहन अधिनियम की धज्जियां उड़ाते हुए निजी पंजीकृत वाहनों को खुलेआम व्यावसायिक रूप से इस्तेमाल किया जा रहा है। सफेद नंबर प्लेट वाले ये वाहन सवारी ढुलाई का काम कर रहे हैं, जबकि कई सरकारी विभाग भी इन्हें किराए पर लेकर नियमों को ताक पर रख रहे हैं।
टैक्स बचाने की जुगत
सूत्रों के मुताबिक, निजी वाहन मालिक व्यावसायिक पंजीकरण से बचकर टैक्स चोरी कर रहे हैं। दरअसल, प्राइवेट वाहनों पर एकमुश्त टैक्स देना होता है, जबकि कमर्शियल वाहनों को हर साल फिटनेस प्रमाणपत्र और टैक्स जमा करना अनिवार्य है। इसी लॉफ्फ़र का फायदा उठाकर वाहन मालिक सफेद नंबर प्लेट लगाकर टैकी/कैब सेवा चला रहे हैं।
विभागीय लापरवाही से बढ़ रहा धंधा
परिवहन विभाग के नियमों के अनुसार, टैक्सी परमिट वाले वाहनों को हर दो साल बाद सालाना फिटनेस टेस्ट और ₹700 टैक्स देना होता है। लेकिन निजी वाहनों को इस प्रक्रिया से छूट मिलने के कारण मालिक बिना किसी डर के कमर्शियल इस्तेमाल कर रहे हैं। शहर के दोस्तपुर समेत कई प्रमुख मार्गों पर ऐसे वाहन खुलेआम यातायात करते दिखाई देते हैं।
कानून क्या कहता है?
मोटर वाहन अधिनियम की धारा 192 के तहत निजी वाहन को कमर्शियल उपयोग में लाने पर पहली बार पकड़े जाने पर ₹5000 जुर्माना और 3 साल तक की जेल हो सकती है। वहीं, दोबारा उल्लंघन करने पर ₹10,000 जुर्माने के साथ वाहन जब्ती और 1 साल की सजा का प्रावधान है। लेकिन जिला परिवहन अधिकारी सत्येंद्र यादव से संपर्क करने के सभी प्रयास नाकाम रहे, जो विभाग की निष्क्रियता को उजागर करता है।
आगे की कार्रवाई
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अब परिवहन विभाग द्वारा सख्त निगरानी और जांच अभियान चलाने की आवश्यकता है, ताकि सरकारी राजस्व की हानि रोकी जा सके। साथ ही, नियम तोड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित करनी होगी।








