
हजपुरा (अम्बेडकरनगर)। बाबा बरुआदास पीजी कॉलेज परुइय्या आश्रम में संविधान दिवस समारोह गरिमामय वातावरण में आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. परेश कुमार पाण्डेय ने की। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान केवल एक विधिक दस्तावेज नहीं, बल्कि भारतीय समाज का जीवन दर्शन है, जो बहुभाषी, बहुसांस्कृतिक और विविध परिवेश वाले राष्ट्र को एक सूत्र में बांधने की शक्ति रखता है। उन्होंने संविधान को राष्ट्र की एकता, अखंडता और समृद्धि का मजबूत मार्गदर्शक बताया।
संविधान में निहित मूल भावना को समझने की जरूरत : उपप्राचार्य
उपप्राचार्य प्रो. पवन कुमार गुप्त ने कहा कि भारतीय संविधान की मूल भावना नागरिक निर्माण, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और मानवतावादी सोच को प्रोत्साहित करती है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे संवैधानिक मूल्यों को केवल पढ़ें ही नहीं, बल्कि उन्हें व्यवहार में भी अपनाएँ, क्योंकि यही एक सशक्त समाज की नींव है।
मूल अधिकार, कर्तव्य और नीति निर्देशक सिद्धांत पर हुई चर्चा
कार्यक्रम में डॉ. रमेश कुमार ने मूल अधिकारों, मूल कर्तव्यों और नीति निर्देशक तत्वों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि अधिकार और कर्तव्य दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं और नागरिकों की सक्रिय भागीदारी से ही संविधान का लक्ष्य पूर्ण हो सकता है।








