बीएचयू में तीन साल बाद फिर गठित हुई एक्जीक्यूटिव काउंसिल

  • बीएचयू एक्जीक्यूटिव काउंसिल के 8 सदस्यों की घोषणा
  • राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बतौर विजिटर किया नामांकन
  • नामित सदस्य तीन वर्षों के कार्यकाल के लिए नियुक्त

वाराणसी। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में लंबे अंतराल के बाद कार्यकारी परिषद (Executive Council) का गठन किया गया है। भारत की राष्ट्रपति एवं विश्वविद्यालय की विजिटर द्रौपदी मुर्मू ने बीएचयू एक्जीक्यूटिव काउंसिल के लिए 8 नए सदस्यों का नामांकन किया है। यह नियुक्ति बीएचयू अधिनियम, 1915 की धारा 14(1) के अंतर्गत की गई है और तत्काल प्रभाव से लागू होगी।

मानव संसाधन विकास मंत्रालय (एमएचआरडी) की ओर से इसकी सूचना बीएचयू के रजिस्ट्रार को भेज दी गई है। नए सदस्यों को तीन वर्षों के कार्यकाल के लिए नियुक्त किया गया है।

2021 के बाद पहली बार हुआ पुनर्गठन
गौरतलब है कि बीएचयू में कार्यकारी परिषद का कार्यकाल 2021 में समाप्त हो गया था, लेकिन उसके बाद से अब तक परिषद का पुनर्गठन नहीं हुआ था। तीन साल बाद परिषद के पुनर्गठन से विश्वविद्यालय प्रशासन में नई ऊर्जा आने की उम्मीद जताई जा रही है।

छात्रों ने जताई खुशी
एक्जीक्यूटिव काउंसिल के गठन की खबर मिलते ही विश्वविद्यालय के छात्रों और शैक्षणिक समुदाय में प्रसन्नता का माहौल है। छात्रों का कहना है कि इससे विश्वविद्यालय की शैक्षणिक और प्रशासनिक गतिविधियां अधिक सुचारू रूप से संचालित होंगी।

क्या है कार्यकारी परिषद की भूमिका?
बीएचयू की कार्यकारी परिषद विश्वविद्यालय का सर्वोच्च कार्यकारी निकाय है, जो विश्वविद्यालय की नीतियों, प्रशासन, वित्त और संपत्ति से संबंधित सभी निर्णयों की देखरेख करती है। इसके अलावा यह परिषद शैक्षणिक विभागों और अनुसंधान केंद्रों के संचालन पर निगरानी रखती है ताकि वे नियमानुसार सुचारू रूप से चल सकें।

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