
नई दिल्ली: वित्त वर्ष 2025-26 के अप्रैल से अक्टूबर तक के पहले सात महीनों में नेट डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन ₹12.92 लाख करोड़ रहा, जो पिछले साल इसी अवधि के ₹12.07 लाख करोड़ से 7% अधिक है। वहीं, रिफंड्स में 17.7% की गिरावट हुई और ये ₹2.42 लाख करोड़ तक रह गए।
नेट डायरेक्ट टैक्स में पर्सनल इनकम टैक्स, कॉर्पोरेट टैक्स और STT शामिल हैं।
अप्रैल-अक्टूबर 2025 में टैक्स कलेक्शन की स्थिति
- नेट डायरेक्ट टैक्स: ₹12.92 लाख करोड़ (+7%)
- ग्रॉस टैक्स कलेक्शन: ₹15.35 लाख करोड़ (+2.15%)
- रिफंड्स: ₹2.42 लाख करोड़ (-17.72%)
- STT (सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स): ₹35,682 करोड़ (लगभग स्थिर)
(आंकड़े 10 नवंबर 2025 तक के हैं)
कलेक्शन बढ़ने और रिफंड्स कम होने के कारण
- सैलरीड लोगों और स्मॉल बिजनेस ओनर्स की बेहतर कमाई से डायरेक्ट टैक्स ग्रोथ।
- नॉन-कॉर्पोरेट टैक्सपेयर्स से मजबूत कलेक्शन।
- रिफंड्स कम होने के दो मुख्य कारण:
- टैक्स लायबिलिटी बैलेंस होने से एक्स्ट्रा रिफंड की जरूरत कम।
- गवर्नमेंट रिफंड प्रोसेसिंग में सतर्क, वेरिफिकेशन स्ट्रिक्ट।
इकोनॉमी पर असर और भविष्य के संकेत
- डायरेक्ट टैक्स रेवेन्यू की स्थिर बढ़त इकोनॉमी के लिए पॉजिटिव संकेत।
- STT फ्लैट रहने से स्टॉक मार्केट में साइडवेज ट्रेंड का संकेत।
- भविष्य में IPO बूम और डिजिटल टैक्स प्रोसेसिंग से कलेक्शन और बढ़ सकता है।
- एक्सपर्ट्स का मानना है कि टैक्स कंप्लायंस में सुधार हुआ है, लेकिन रिफंड डिले से ट्रस्ट इश्यू बन सकता है।








