भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने गगनयान कार्यक्रम के तहत क्रू मॉड्यूल (CM) और सर्विस मॉड्यूल (SM) को अलग करने वाले सिस्टम की टेस्टिंग पूरी कर ली है। इन परीक्षणों के जरिए सिस्टम के डिजाइन की क्षमता की पुष्टि हुई है। परीक्षण तिरुवनंतपुरम स्थित विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर (VSSC) में किए गए। गगनयान भारत का मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम है, जिसके तहत भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरिक्ष में भेजने की योजना है।
क्या है क्रू मॉड्यूल और सर्विस मॉड्यूल?
गगनयान का ऑर्बिटल मॉड्यूल दो प्रमुख हिस्सों से मिलकर बना है। इनमें क्रू मॉड्यूल और सर्विस मॉड्यूल शामिल हैं। क्रू मॉड्यूल में अंतरिक्ष यात्री रहते हैं, जबकि सर्विस मॉड्यूल मिशन के दौरान आवश्यक सेवाएं और सहायता उपलब्ध कराता है। दोनों मॉड्यूल एक विशेष सेपरेशन सिस्टम से जुड़े होते हैं। इनके बीच अंबिलिकल कनेक्शनों के माध्यम से बिजली और तरल पदार्थों की आपूर्ति होती है।
पृथ्वी पर लौटने से पहले अलग होंगे दोनों मॉड्यूल
लॉन्च से पहले क्रू मॉड्यूल और सर्विस मॉड्यूल को आपस में जोड़ा जाता है। अंतरिक्ष में मिशन के निर्धारित चरण के दौरान दोनों एक इकाई के रूप में काम करते हैं। पृथ्वी के वायुमंडल में दोबारा प्रवेश करने से पहले क्रू मॉड्यूल सर्विस मॉड्यूल से अलग हो जाता है। इस प्रक्रिया में कई घटनाएं तय क्रम में होती हैं। ऐसे में सेपरेशन सिस्टम का सही तरीके से काम करना मिशन की सुरक्षा और सफलता के लिहाज से महत्वपूर्ण है।
परीक्षण में पूरे सिस्टम के डिजाइन की जांच
ISRO ने सेपरेशन सिस्टम की कार्यक्षमता और डिजाइन की पुष्टि के लिए विशेष परीक्षण किए। इसके लिए क्रू मॉड्यूल और सर्विस मॉड्यूल की संयुक्त संरचना तैयार की गई थी। परीक्षण के दौरान पूरी प्रक्रिया पर नजर रखने और अलग-अलग मापदंडों का आकलन करने के लिए बड़ी संख्या में उपकरण लगाए गए थे। संगठन के मुताबिक, परीक्षणों से सेपरेशन सिस्टम के डिजाइन की क्षमता की पुष्टि हुई।
क्रू मॉड्यूल के कई अहम सिस्टम भी परखे गए
परीक्षणों के दौरान क्रू मॉड्यूल के कई महत्वपूर्ण सिस्टम की मजबूती और झटके सहने की क्षमता का भी आकलन किया गया। इनमें एवियोनिक्स सिस्टम, इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम और पिछले हिस्से में मौजूद शंकु के आकार के हीट शील्ड का थर्मल प्रोटेक्शन सिस्टम शामिल है।
इसके अलावा क्रू मॉड्यूल डिप्लॉयबल अंबिलिकल शील्ड की भी जांच की गई। क्रू मॉड्यूल को सीधा रखने वाले अप राइटिंग सिस्टम और तापमान व आर्द्रता नियंत्रित करने वाले सिस्टम से जुड़े पाइरोटेक्निक उपकरण भी परीक्षण का हिस्सा रहे।









