- 2025 में 5 लाख से ज्यादा विदेशी मरीज पहुंचे भारत
- सस्ता इलाज और विशेषज्ञ डॉक्टर बने सबसे बड़ी वजह
- 2030 तक मेडिकल टूरिज्म बाजार दोगुना होने का अनुमान
नई दिल्ली। भारत तेजी से वैश्विक मेडिकल टूरिज्म हब के रूप में उभर रहा है। वर्ष 2009 में जहां 1.12 लाख विदेशी मरीज इलाज के लिए भारत आए थे, वहीं 2025 में यह संख्या बढ़कर 5.07 लाख से अधिक हो गई। यानी 16 वर्षों में विदेशी मरीजों की संख्या करीब 4.5 गुना बढ़ चुकी है।
विदेशी मरीजों का बढ़ता भरोसा
बांग्लादेश, इराक, उज्बेकिस्तान, सोमालिया, ओमान और केन्या सहित कई देशों के मरीज इलाज के लिए भारत का रुख कर रहे हैं। 2025 में भारत का मेडिकल टूरिज्म बाजार करीब 84 हजार करोड़ रुपए का रहा, जिसके 2030 तक 1.56 लाख करोड़ रुपए तक पहुंचने का अनुमान है।
सस्ता इलाज और विशेषज्ञ डॉक्टर बड़ी ताकत
भारत में विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता, जल्दी अपॉइंटमेंट, कम समय में जांच रिपोर्ट और पहले से तय इलाज की लागत विदेशी मरीजों को आकर्षित कर रही है। कई देशों की तुलना में भारत में इलाज काफी कम खर्च में और कम समय में पूरा हो जाता है।
मजबूत स्वास्थ्य ढांचा
देश में 69,364 अस्पताल हैं, जिनमें 43,486 निजी और 25,778 सरकारी अस्पताल शामिल हैं। भारत में करीब 12 लाख पंजीकृत डॉक्टर हैं और 1,299 अस्पतालों को एनएबीएच की मान्यता प्राप्त है। विशेषज्ञों का मानना है कि यही मजबूत स्वास्थ्य ढांचा मेडिकल टूरिज्म को गति दे रहा है।
172 देशों को ई-मेडिकल वीजा
विदेशी मरीजों की सुविधा के लिए भारत 172 देशों को ई-मेडिकल वीजा उपलब्ध करा रहा है। मरीजों के साथ आने वाले सहयोगियों के लिए ई-मेडिकल अटेंडेंट वीजा और आयुर्वेद, योग, यूनानी तथा होम्योपैथी जैसी पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के लिए ई-आयुष वीजा की भी व्यवस्था की गई है। वहीं, ‘हील इन इंडिया’ पोर्टल को भी एकीकृत मंच के रूप में विकसित किया जा रहा है।









