कर्म और संस्कारों को बताया जीवन की पहचान

स्वामी ओमप्रकाश बोले—जैसे बीज के गुण से फल का स्वाद तय होता है, वैसे ही कर्म और संस्कार बनाते हैं व्यक्ति का व्यक्तित्व; सैकड़ों लोगों ने लिया धर्म रक्षा का संकल्प

अंबेडकरनगर। टांडा तहसील क्षेत्र के हकीमपुर गांव में आयोजित संत सम्मेलन में कर्म, संस्कार और सदाचार का संदेश दिया गया। वरिष्ठ समाजसेवी विद्याराम विश्वकर्मा की ओर से आयोजित कार्यक्रम में संतों ने सनातन धर्म के सिद्धांतों पर चलने और देश, धर्म व मर्यादा की रक्षा के प्रति सजग रहने का आह्वान किया। सम्मेलन में सैकड़ों लोगों ने धर्म रक्षा का संकल्प लिया।

मिशन योगी अगेन सीएम उत्तर प्रदेश के प्रदेश संयोजक स्वामी ओमप्रकाश ने कहा कि मनुष्य के जीवन की पहचान उसके कर्मों और संस्कारों से होती है। सृष्टि में जीवन अनमोल है, लेकिन मनुष्य अपने साथ कुछ लेकर नहीं जाता। ऐसे में उसके आचरण और कर्म ही महत्वपूर्ण होते हैं। उन्होंने लोगों से अच्छे विचार अपनाने और अपने व्यवहार में सदाचार को स्थान देने की अपील की।

बीज के गुण से तय होता है फल का स्वाद

स्वामी ओमप्रकाश ने कर्म और संस्कारों का महत्व समझाने के लिए प्रकृति का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि बारिश का पानी पेड़-पौधों और फसलों को समान रूप से मिलता है, लेकिन करेला कड़वा, गन्ना मीठा और इमली खट्टी होती है। इसकी वजह उनके बीजों के अलग-अलग गुण हैं। इसी तरह व्यक्ति के संस्कार और कर्म उसके व्यक्तित्व को आकार देते हैं।

उन्होंने कहा कि मनुष्य को अपने विचार, आचरण और व्यवहार में अच्छे संस्कारों को अपनाना चाहिए। ‘ईशावास्यमिदं सर्वम्’ के भाव का उल्लेख करते हुए उन्होंने सृष्टि के प्रति सम्मान और अपने कर्तव्यों के निर्वहन पर जोर दिया।

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