
- क्या है सेलेबी एयरपोर्ट सर्विसेज और क्यों रद्द की गई इसकी सुरक्षा मंजूरी?
- तुर्किये की 10,000 नौकरियों पर संकट: भारत सरकार के फैसले का असर
- ऑपरेशन सिंदूर के बाद बढ़ा विरोध, तुर्किये की कंपनियों पर कसेगा शिकंजा
नई दिल्ली। ऑपरेशन सिंदूर के बाद देश में तुर्किये, चीन और अजरबैजान के खिलाफ बढ़ते आक्रोश के बीच भारत सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय के अधीन ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन सिक्योरिटी (BCAS) ने तुर्किये की कंपनी सेलेबी एयरपोर्ट सर्विसेज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड की सुरक्षा मंजूरी तत्काल प्रभाव से रद्द कर दी है।
इस फैसले के बाद अब सेलेबी देश के किसी भी एयरपोर्ट पर ग्राउंड हैंडलिंग सेवाएं नहीं दे सकेगी। यह कदम राष्ट्रीय सुरक्षा के मद्देनज़र उठाया गया है। सेलेबी, तुर्किये के सेलेबी ग्रुप का हिस्सा है और भारत के नौ बड़े हवाई अड्डों—दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद, कोच्चि, कन्नूर, गोवा, अहमदाबाद और चेन्नई—पर अपनी सेवाएं दे रही थी।
सेलेबी का दावा: भारत में 10,000 लोगों को दे रहे रोजगार
सेलेबी ने अपने बचाव में कहा है कि वह पिछले 15 वर्षों से भारत में कार्यरत है और ग्राउंड हैंडलिंग क्षेत्र में शीर्ष स्थान पर है। कंपनी के अनुसार, उसने 220 मिलियन डॉलर से अधिक का निवेश किया है और भारत में 10,000 से ज्यादा लोगों को सीधे रोजगार दिया है।
1958 में स्थापित सेलेबी एयरपोर्ट सर्विसेज वर्तमान में तुर्किये, हंगरी, जर्मनी, तंजानिया, इंडोनेशिया समेत कई देशों में काम कर रही है और 400 से अधिक एयरलाइंस को सेवाएं देती है।
अडाणी एयरपोर्ट्स ने चीनी कंपनी ड्रैगनपास से तोड़ा करार
इस बीच, अडाणी एयरपोर्ट होल्डिंग्स लिमिटेड ने भी चीन की कंपनी ड्रैगनपास के साथ अपना करार समाप्त कर दिया है। यह कंपनी एयरपोर्ट लाउंज एक्सेस जैसी सेवाएं देती थी और यात्रियों के पासपोर्ट विवरण व ट्रैवल डेटा को संभालती थी। डेटा सुरक्षा के लिहाज से ड्रैगनपास पर पहले से ही सवाल उठते रहे हैं।
कंपनी प्रवक्ता के मुताबिक, ड्रैगनपास के यूजर्स को अब अडाणी द्वारा संचालित एयरपोर्ट्स पर लाउंज की सुविधा नहीं मिलेगी।
आजादपुर मंडी ने तुर्किये से सेब मंगाने से किया इनकार
एशिया की सबसे बड़ी फल-सब्जी मंडी दिल्ली की आजादपुर मंडी ने भी तुर्किये के सेबों के आयात पर रोक लगाने का ऐलान कर दिया है। मंडी अध्यक्ष मीठा राम कृपलानी ने कहा कि 2024 में भारत ने तुर्किये से 1.16 लाख टन सेब आयात किए थे, लेकिन अब नया कोई ऑर्डर नहीं दिया जाएगा। पुराने ऑर्डर ही पूरे किए जाएंगे।
शिमला के एक सेब किसान अक्षय ठाकुर ने भी मांग की है कि पाकिस्तान समर्थक देशों—तुर्किये और चीन—से सेब के आयात पर प्रतिबंध लगाया जाए या इन पर आयात शुल्क बढ़ाया जाए।








