
- विराट कोहली के संन्यास के पीछे की बड़ी वजह क्या है
- क्या रोहित के बाद कोहली का जाना टेस्ट क्रिकेट का टर्निंग पॉइंट है
- टेस्ट में 30 शतक जड़ने वाले कोहली का अब नहीं दिखेगा पुराना जलवा
नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट के सबसे चमकते सितारों में से एक, विराट कोहली ने टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेने का मन बना लिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कोहली ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) को अपने फैसले की जानकारी दे दी है, लेकिन बोर्ड ने उन्हें इस फैसले पर दोबारा विचार करने की सलाह दी है। इंग्लैंड के आगामी टेस्ट दौरे को देखते हुए BCCI को उम्मीद है कि कोहली अपना निर्णय बदल सकते हैं। अभी तक कोहली ने बोर्ड को कोई जवाब नहीं दिया है।
इससे पहले गुरुवार को टीम इंडिया के मौजूदा कप्तान रोहित शर्मा ने भी टेस्ट क्रिकेट को अलविदा कहने की घोषणा की थी। अब कोहली के फैसले ने भारतीय टेस्ट क्रिकेट में एक युग के अंत की आशंका जता दी है।
प्रदर्शन में गिरावट, फिर भी योगदान शानदार
बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी (BGT) 2024-25 में कोहली का प्रदर्शन उम्मीदों के अनुरूप नहीं रहा। उन्होंने सीरीज में 23.75 की औसत से केवल 190 रन बनाए, जिसमें एक नाबाद शतक शामिल था। 9 पारियों में 7 बार वह ऑफ स्टंप के बाहर की गेंदों पर आउट हुए। पिछले पांच वर्षों में कोहली ने 37 टेस्ट में सिर्फ 3 शतक लगाए और उनका औसत 35 से भी कम रहा है।
हालांकि, IPL 2025 में विराट जबरदस्त फॉर्म में नजर आए हैं। उन्होंने अब तक 11 मैचों में 505 रन बनाकर साबित किया है कि वह अभी भी क्रिकेट के टॉप लेवल पर प्रदर्शन करने की क्षमता रखते हैं।
टेस्ट में विराट का स्वर्णिम सफर
36 वर्षीय कोहली ने अपने टेस्ट करियर में अब तक 123 मैच खेले हैं और 9,230 रन बनाए हैं। इनमें 30 शतक और 31 अर्धशतक शामिल हैं। टेस्ट में कोहली ने सबसे ज्यादा 14 शतक भारतीय सरजमीं पर बनाए, जबकि ऑस्ट्रेलिया में उनके 9 शतक हैं। वहीं, न्यूजीलैंड में उन्होंने केवल एक शतक जमाया है।
बतौर कप्तान, विराट का दबदबा
टेस्ट क्रिकेट में कप्तान के रूप में विराट कोहली का रिकॉर्ड बेहद प्रभावशाली रहा है। उनकी कप्तानी में भारत ने घरेलू मैदान पर एक भी टेस्ट सीरीज नहीं गंवाई। उन्होंने 11 में से सभी 11 घरेलू टेस्ट सीरीज में टीम को जीत दिलाई। जबकि रोहित शर्मा और महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में भारत को घरेलू टेस्ट सीरीज में हार का सामना करना पड़ा था।
कोहली की आक्रामक कप्तानी और रणनीतिक सोच ने भारत को विदेशों में भी चुनौती देने वाला मजबूत टेस्ट यूनिट बनाया। उनकी कप्तानी में कोहली ने 7 दोहरे शतक भी लगाए, जो एक कप्तान के तौर पर विश्व रिकॉर्ड के करीब है।
कोहली का टेस्ट क्रिकेट में प्रभाव
2014 में इंग्लैंड दौरे पर निराशाजनक प्रदर्शन के बाद 2018 में उन्होंने शानदार वापसी की और सीरीज के टॉप स्कोरर बने। ऑस्ट्रेलिया में भी कोहली हमेशा रन बनाते आए हैं। उन्होंने साउथ अफ्रीका में भी शतक लगाकर खुद को हर परिस्थिति में साबित किया।








