भारत को मिला नया मुख्य न्यायाधीश- भूषण गवई ने ली शपथ

  • कार्यकाल रहेगा सिर्फ 6 महीने
  • मां ने कहा – “मेहनत और सेवा का मिला फल”
  • 1985 से शुरू किया कानूनी करियर

नई दिल्ली।  भारत के सर्वोच्च न्यायालय को मंगलवार को नया मुखिया मिल गया। जस्टिस भूषण रामकृष्ण गवई ने भारत के 52वें मुख्य न्यायाधीश (CJI) के रूप में शपथ ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में उन्हें पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, गृह मंत्री अमित शाह सहित कई प्रमुख हस्तियां उपस्थित रहीं।

जस्टिस गवई का कार्यकाल सीमित है — वे आगामी 23 नवंबर 2025 को सेवानिवृत्त होंगे। वे देश के पहले बौद्ध और दूसरे दलित मुख्य न्यायाधीश हैं। उनसे पहले जस्टिस के. जी. बालाकृष्णन ने 2007 में यह पद संभाला था।

साधारण पृष्ठभूमि से सर्वोच्च पद तक का सफर

महाराष्ट्र के अमरावती जिले के निवासी जस्टिस गवई ने वर्ष 1985 में अपने कानूनी करियर की शुरुआत की। 1987 में बॉम्बे हाईकोर्ट में स्वतंत्र वकालत शुरू की और कई वर्षों तक सरकारी वकील के रूप में कार्य किया। 2003 में उन्हें बॉम्बे हाईकोर्ट का अतिरिक्त न्यायाधीश बनाया गया, और 2005 में वे स्थायी जज बने। 2019 में उनका सुप्रीम कोर्ट में प्रमोशन हुआ।

मां ने कहा – “मेहनत और सेवा का मिला फल”

CJI गवई की मां कमलताई ने भावुक होकर कहा, “भूषण ने कठिनाइयों से लड़कर यह मुकाम हासिल किया। उन्होंने साधारण स्कूल से पढ़ाई की और हमेशा दूसरों की मदद की।” उन्होंने बताया कि गवई ने हमेशा सेवा का मार्ग चुना और समाज के लिए कार्य किया।

अहम फैसलों में निभाई भूमिका

जस्टिस गवई कई ऐतिहासिक निर्णयों का हिस्सा रहे हैं। उन्होंने नोटबंदी को वैध करार देने वाले फैसले में सरकार का पक्ष स्वीकार किया था, वहीं हाल ही में उन्होंने चुनावी बॉन्ड योजना को असंवैधानिक ठहराने वाले बहुमत फैसले में भी योगदान दिया।

न्यायपालिका में विश्वास बनाए रखने की बात कही थी

2024 में गुजरात के अहमदाबाद में एक सम्मेलन में जस्टिस गवई ने कहा था कि यदि लोगों का भरोसा न्यायपालिका से उठ गया तो वे ‘भीड़ का न्याय’ अपनाने लगेंगे। उन्होंने न्यायिक नैतिकता और पारदर्शिता को लोकतंत्र के लिए अनिवार्य बताया था।

अब अगली कतार में जस्टिस सूर्यकांत

वरिष्ठता क्रम में जस्टिस सूर्यकांत अब सुप्रीम कोर्ट में सबसे आगे हैं। संभावना है कि नवंबर में जस्टिस गवई के रिटायरमेंट के बाद वे भारत के 53वें मुख्य न्यायाधीश बन सकते हैं।

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