“भारत की अवधारणा सबको साथ लेकर चलने की” : मनमोहन वैद्य

अंबेडकरनगर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य मनमोहन वैद्य ने मंगलवार को नगर के लोहिया सभागार में आयोजित प्रमुख जन गोष्ठी को संबोधित करते हुए भारत की मूल अवधारणा, सांस्कृतिक पहचान और आर्थिक दृष्टि पर विस्तार से विचार रखे। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और प्रबुद्धजन उपस्थित रहे।

सर्वसमावेशी संस्कृति पर जोर

लोहिया सभागार में आयोजित कार्यक्रम में वैद्य ने कहा कि भारत की अवधारणा सबको साथ लेकर चलने की है। उन्होंने कहा कि भारत की संस्कृति विविधताओं को स्वीकार करने वाली संस्कृति है, जहां भिन्नता को विभाजन का कारण नहीं, बल्कि एकता का आधार माना जाता है। भारत पराए को भी अपना मानकर आगे बढ़ने की परंपरा रखता है और समाज को परिवार के रूप में देखता है।

उन्होंने कहा कि भारतीय चिंतन समाज-केंद्रित है। यहां व्यक्ति की प्रगति समाज से जुड़ी होती है। यही कारण है कि भारतीय परंपरा में समन्वय और सहअस्तित्व को विशेष महत्व दिया गया है।

आर्थिक दृष्टिकोण पर टिप्पणी

गोष्ठी में वैद्य ने आर्थिक सोच पर भी विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि समृद्धि अर्जित करना आवश्यक है, लेकिन उसका वितरण और समाज के प्रति दायित्व निभाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा, “खूब कमाओ, वितरण करो और जो बचे उसे समाज को वापस लौटाओ।”

ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए उन्होंने कहा कि प्राचीन काल में भारत उद्योग और व्यापार में अग्रणी था। उन्होंने यह धारणा खारिज की कि भारत केवल कृषि प्रधान देश था। उनके अनुसार भारत विश्व व्यापार का प्रमुख केंद्र रहा है और यहां की आर्थिक संरचना बहुआयामी थी।

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